आया ऋतुराज

देखो ! इतराते तरुवर में
और लहराती फ़सलों में भी ..
लगा सुनाई देने फिर से ,
ऋतु परिवर्तन का उद्घोष ..!

कान्ति भास्कर की अब तो ,
निसदिन हो रही अधिक प्रखर ..
तीव्र तेज का वेष धर ,
हुआ ताप अब अधिक मुखर ..!

इधर – उधर मुंडेरों पर और
एक डाल से दूजी डाली
खग , भ्रमर चहकते हैं ऐसे
उनमें भी नव-उमंग हो जैसे ..!

नव किस्लय / नव पल्लव ,
नव वर्तिका / नव सुमन अंग ..
प्रकृति ने चहुँओर बिखेरे
अति मनभावन शुभ नव-रंग ..!

नव- रंग लिए वसुधा ने देखो
कर लिया है नूतन सा श्रृंगार ..
संग वासंती बयार भी आई है
लिये मधुर मनभावन मनुहार ..!

शीत ऋतु का हो रहा अंत ,
और , वीणा के स्वर साथ लिए ,
देखो – देखो …. देखो ना ……
आया है ऋतुराज वसंत…!!!

  • सौम्या श्रीवास्तव

वाराणसी

Leave a Comment