इस होली के रंग में

मैने तन-मन खुब भिंगोया ,

इस होली के रंग में ,

तुम भी प्रेम की इस खुश्बू को

रख लो अपने संग में ।

 

ऐसा रंग रंगें मिलजुल कर

फीकी ना हो पाये ,

जीवन-उत्सव की खुशियों से

हर कोना भर जाये ।

 

अब के बरस कुछ यूं कर डालें

सबको साथ बुलाकर ,

अपने दिल की खुशियां बाटें

सबको गले लगाकर ।

 

अबीर-गुलाल और झांझ-मजीरे

सबका दिल बहलायें ,

रौशन दिल ,बेदार नज़र के

फिर से दीये जलायें …

 

मैने दिल के दाग़ मिटाये,

इस होली के रंग में,

तुम भी अपने तन-मन धो- लो

मदनोत्सव उमंग मे ।

 

  • संजय कुमार चतुर्वेदी

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