गाजियाबाद के धरती से पहिली बेरा कवनों भोजपुरी किताब के लेखन आउर लोकार्पण भइल —-

 

जयशंकर प्रसाद द्विवेदी के लिखल भोजपुरी काव्य संकलन ” पीपर के पतई ” के लोकार्पण कल पूर्वाञ्चल भोजपुरी महासभा के आहूत परिचरचा “भोजपुरी भाषा के रचनात्मक आंदोलन ” जवन कविनगर स्थित वरिष्ठ नागरिक मनोरंजन केंद्र मे भइल । भोजपुरी भाषा के विकास खाति का करल जा सकेला , कइसे करल जा सकेला , एह आंदोलन मे अबे तक का का भयल बा , कब से भोजपुरी के रचनात्मक आंदोलन शुरू भइल आउर आगे एह आंदोलन के कइसे गति दीहल जा सकत बा , एहु बात पर विचार कइल गइल ।
परिचारचा मे बोलत अध्यक्ष मैनेजर पाण्डेय जी कहनी कि कबीर बाबा भोजपुरी के आदि कवि बानी आउर हिन्दी के विकास खाति भोजपुरी के बलि ना दीहल जा सकत । विशिष्ट अतिथि डॉ रमाशंकर श्रीवास्तव जी अनगिनत ज्ञात – अज्ञात भोजपुरी के रचनात्मक आंदोलन के सेवकन इयाद करत कहनी कि आज भोजपुरी भाषा के लग्गे सभ कुछ ह । भोजपुरी भाषा कवनों बात के मोहताज नईखे । आज तक भोजपुरी भाषा के हर विधा पर काम भइल बा आउर हो रहल बा ।
भोजपुरी भाषा मान्यता आंदोलन के अध्यक्ष संतोष पटेल जी अपने तथ्यपरक उदाहरन से भोजपुरी भाषा के रचनात्मक आंदोलन के दमदार पक्ष रखनी । इंद्रा गांधी मुक्त विश्व विद्यालय से आइल डॉ सुशील तिवारी जी भोजपुरी भाषा के गरिमामई इतिहास आउर एकरे शबदन विशाल भंडार पर प्रकाश डलने । कार्यक्रम के उदघाटन करता के रूप मे आइल भोजपुरी महासभा दिल्ली के अध्यक्ष अजीत दुबे जी संविधान के आठवीं अनुसूची के लेके हो रहल प्रयासन पर आपन विचार रखने ।
विषय प्रवर्तन करत जयशंकर प्रसाद द्विवेदी जी अपने उद्बोधन मे कहनी – “भाषा के सवाल चारूओर बा। भाषा खाली अपना अनुभव के अभिव्यक्त करे के रास्ता ना ह, ऊ त सभ्यता के संस्कारित करे वाला वीणा ह आ संस्कृति के शब्द देबे वाला वाणी ह। आज के मंच बड़ा समृद्ध बा। एकरा समृद्धि के ई कारण बा कि ईहाँ भोजपुरी के चिंता करे वाला हर प्रकार के मनीषी आ व्यक्तित्व के आगम भइल बा। विषय के प्रस्तुत करत हम ईहे कहब कि आज भोजपुरी खातिर कतहूँ से निराशा के बात नइखे। साहित्य के खूबे संवर्धन होता। अनगिनत पत्रिका-ई पत्रिका प्रकाशित हो रहल बाड़ी, ‘भोजपुरी-टाइम्स’ जइसन दैनिक समाचार पत्रो निकलत बा, अनगिनत लोग लिखतो बा, किताबो छपत बा, बाकिर पाठक जागरूक बाड़े का? केहू ओह कितबवन के खरीद के पढ़े के तैयार बा का? ई सबसे बड़का दुख के बात बा? तनी एहू पर विद्वत समाज के सोचे के पड़ी ?”
पूर्वाञ्चल भोजपुरी महासभा के अध्यक्ष अशोक श्रीवास्तव जी अपने उद्बोधन मे कहने कि गाजियाबाद के भोजपुरिया भोजपुरी भाषा के संवर्धन खाति हमेशा तइयार बा । अगहूँ अइसन कार्यक्रम गाजियाबाद मे होत रही । मंच संचालन भोजपुरी के सुप्रसिद्ध कवि मनोज भावुक जी कइनी । कार्यक्रम हर परकार से परिपूर्ण आउर सफल रहल ।

 

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