चारि गो चइता

 :: रामरक्षा मिश्र विमल::

1.

 जाए नाहीं देबि हम बहरवा ए रामा , एह पारी तोहके।

भले तनी कम मिली ओतने में रहबो

गाँवही में करबो गुजरवा ए रामा, एह पारी तोहके।

तहरे करेजवा से सटिके जुडइबो

नाहीं चाहीं घूमे के शहरवा ए रामा, एह पारी तोहके।

पइसा के भूखे काहें देंहिया सुखइब

हम पिअबि बिरह जहरवा ए रामा , एह पारी तोहके।

 

2.

 रोंआ-रोंआ खुशिया समाइल ए रामा, पिया घरे अइले।

मध दुपहरिया के तपल बटोहिया

पनिया से जइसे अघाइल ए रामा, पिया घरे अइले।

सपनो में देखीं अँकवरिया बलमु के

आजु मोरा हियरा जुडाइल ए रामा, पिया घरे अइले।

सिहरेला अंग-अंग खिलि गइले जोबना

पोरे-पोरे रस भरि आइल ए रामा, पिया घरे अइले।

3.

 पिया नाहीं चइत में घरवा ए रामा, केकरा ले बोलीं ?

बेला आ चमेली सभ फूल फूलि गइले

जोबनो के फुलवा फुलइले ए रामा, केकरा ले बोलीं ?

करेला मोबाइले प आजु-काल्हु रोजहीं

बइठींले कइके सिंगरवा ए रामा, केकरा ले बोलीं ?

सपनो में चुरिया खनकि जाले रहि-रहि

बहि जाला आँखि के कजरवा ए रामा, केकरा ले बोलीं ?

4.

बदलल समतवा सुहावन ए रामा, चइत महिनवा ।

बिगत बरिसवा के भइले बिदाई

नवका अनाज के ओसावन ए रामा, चइत महिनवा ।

ठुनकेली गोरिया बहरवा ना जइह

करेला बलमुआ मनावन ए रामा, चइत महिनवा ।

सभ भाई मिलि जाले बढ़ेला परेमवा

गंगा नियन घर होला पावन ए रामा, चइत महिनवा ।

 

 

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