जोगीजी….धीरे-धीरे! जोगीजी…..बाह…..जोगीजी!

पं. प्रभाकर पांडेय गोपालपुरिया

गाना-बजाना ना आवेला हमरा, पर गाना-बजाना सुनल बहुते नीक लागेला। हँ पर लोकगीतन, पुराना गीतन आदि के सुनल हम खूब पसंद करेनी। इ जवन सीर्सक बा- जोगीजीवाला, इहां इ गाना की रूप में नइखे, हम जोगीजी के बात करतानी। जी हाँ, योगी आदित्यनाथ जी के, यूपी की माननीय मुख्यमंत्री जी के। यूपी में जवनेगाँ भाजपा जीतलि ह, सायद ओंगा केहू के उम्मीद ना रहल होई। साइकिल पूरा तरे पेंचर हो गइल, हाथ के लकवा मार देहलसि अउर हाथी चिघाड़त अपनी हथुआन (हथुआनी) के पूरा तरे नीचे पटकि देहलसि। खैर भाजपा के मिलल ए बड़ी जीत की बाद भाजपा के सिरदर्द बड़ि गइल, ए बात के लेके की अब मुख्यमंत्री के के बनावल जा?बहुत नाम उछलल पर जोगीजी के कट्टर छवि के दोहाई देत उनके अधिकतर लोग गिने ना पर बहुत लोग के इहो लागे की जोगी जी ही यूपी में मुख्यमंत्री के सबसे बड़ चेहरा बाने, अगर उनके मुख्यमंत्री नइखे बनावल जात त उनके केंद्र में जरूर कवनो बड़हन पद से नवाजल जाई! पर रउआँ, हमरा इहो पता होखे के चाहीं की देस के जवन प्रधानमंत्री जी बाने, उहो तो कुछ सोंचत होइहें। लाख भाजपा चाहे पर मोदीजी के बात के नजरअंदाज ना क सके। त हमरा लागता की एगो जोगी के यूपी के ताज देहल पूरा तरे मोदीजी के देन बा। खैर इ जवन ताज बा उ कांटोभरा बा पर इहो मत भुलाईं की इ ताज एगो जोगी धारन कइले बा, उ हे जोगी जवन कांटन में भी फूल खिलावे के छमता राखे ला। जमीन से सदा जुड़ल मनई खातिर कांटन के ताज के कवनो अहमियत नइखे, उ त ओ कांटन के हीरन में बदलि देला, काहें की ओकरा राजनीति भा राज करे के ना रहेला, ओकरा काम करे के रहेला, जनता की परेसानियन के दूर करे के रहेला अउर जोगी की रूप में एगो नैतिक, विकसित राज के स्थापना करे के रहेला। ओकरा देखावा ना, ओकरा नेतागीरी ना, ओकरा जनता प्रिय होले अउर जनता की सुख-चैन खातिर उ आपन नींद, आराम के कुरबान क देला। जोगी बनल आसान ना होला, बहुत कठिन डगर ह जोगी के अउर ओ हू से कठिन कवनो जोगी खातिर इ काम होला की समाज में रहि के, समाज की भलाई के काम करत अपनी
जोगीपन के भी बनावल राखल।
जोगीजी यूपी के गद्दी के नमन करत एगो जोगी की रूप में आपन काम सुरू क देले बानीं। उहां के अबहीं ले जवन निर्नय ले ले बानीं उ समाज की, राज की हित में बा, ए में कवनो दु राय नइखे। उहां के जवन सोंच बा उ पूरा तरे सकारात्मक बा अउर परदेस, जनता की हित में बा। उहां का सर्वजन हिताय के धेयान में राखि के काम क रहल बानीं। हँ पर कुछ निर्नयन पर कुछ लोग सवाल भी उठा रहल बा पर हमरी विवेक से इ सब निर्नय समय के मांग बा अउर जरूरी भी। ए कुछ निर्नयन से काफी कुछ बदले के आसार बा अउर एकर अन्य समस्यावन पर भी काफी प्रभाव पड़ी अउर एक तीर से कई निसाना हो जाई।
‘जोगीजी धीरे-धीरे’ वाला अपनी बात पर आईं ओकरी पहिले हम रउआँ सब के सीर्सक के बाद के बाति यानी ‘जोगीजी बाह…जोगीजी’ की बारे में बता देहनीं। मने जोगीजी के काम नमन करे जोग बा, ए से सकारात्मक बदलाव के पूरा उम्मेद बा। पर हँ जोगीजी धीरे-धीरे वाला बात से हम इ कहल जाहतानी की कवनो भी निर्नय
जल्दबाजी में उठवले से बचे के चाहीं अउर पूरा सोच-समझि के ओ निर्नय की हानि-लाभ के विचार कइले की बाद ही ओ के लागू करे के चाहीं। भले कम्मे निर्नय होखे पर पूरा कोसिस होखे की उ दूरदर्शिता से भरल होखे, सकारात्मकता से भरल होखे। कवनो एइसन निर्नय नइखे कइले के ताक की बाद में ओ में बार-बार सुधार के परे, जनता की सामने आपन सफाई पेस करे के परे। खैर अगर हजारन को काम करे के बा, निर्नय लेबे के बा त कुछ हो सकेला की सही न निकल पावे पर एकर मतलब इ ना की काम कइल, निर्नय लेहल ही बंद क देहल जाव। त जोगी जी, राउर काम बाहबाही की जोग बा, देस-परदेस, समाज हित में बा, सकारात्मक बा, दूरदर्सिता से भरल बा पर फेर इ हे कहबि की निर्नयन के लेत समय काफी सोंच-बिचार कइल जाव।
अब एगो अउर बात, जवन कई दिन से मन में उछल-कूद मचवले बा, ओ हू के थोड़े में कहि लेहल ठीके रहि, अपनो मन हलुक हो जाई। कट्टरता की परिभासा के सही मायने में जे समझत होई उ जोगीजी के कबो कट्टर कहिए ना सकेला। जोगीजी एगो पूर्ण हिंदू बानीं जवन हिंदू धर्म की मान्यतावन के जन हित में, समाज हित में लगावेनीं। अरे भाई, सिवाजी के देखि लीं, अपनी समय में गैर
धर्मन के कवनो हानि ना पहुँचवनि पर अपनी धरम के रछा करत रहनीं, अपनी राज के रछा करत रहनीं, ओहींगा जोगीजी सब धर्मन के सनमान करत अपनी धरम में पूरा विस्वास दर्सावतानी त ए में बुराई का बा? अगर केहू क्रास के माला पहिनि के, नियमित चर्च में जा के पूजा पाठ कइले की बाद भी, केहू सेरवानी पहिनी के टोपी लगा के मस्जिद आदि में, टरेन, हवाईअड्डा आदि पर नमाज पढ़ले की बाद भी कट्टर नइखे हो सकत त का टीका-चंदन लगा लेहले से, भगवा पहिन लेहले से, अपनी देवी-देवता के जप कइले से, अपनी धरम में पूर्ण विस्वास दरसवले से कवनो हिन्दू के कट्टर कहल ठीक बा, अउर उ हो, ओ हिंदू के जवन समाज में सब
धर्मन, जातियन के आदर करत सबकी विकास के बात करता, सबके ले के चलता? ना-ना, जोगीजी पर इ आरोप पूरा तरे बेबुनियाद बा। उहां का एगो पूर्ण हिंदू बानी, जवन हिंदू की एगो संप्रदाय माने जोगिया समाज, नाथ समाज के आगे बढ़ा रहल बानी। हमरा पूरा उम्मेद बा की उत्तर प्रदेश, उत्तम प्रदेश बनीं अउर इहां विकास के गंगा बही। सादर आभार अउर बहुत-बहुत सुभकाना बा जोगीजी के।

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