भोजपुरिया के? एगो लहमर सवाल बा……

भोजपुरिया के? भोजपुरिया के?ए पर अइले से पहिले एगो बिरतांत सुना देहल चाहबि। हमरा मोन परेला की पहिले जब बरदेखुआ आवे (आवेंसन) त लइका के केहू करीबी ओ बरदेखूअन से कहे की लइका की मामा की चचिआउत फूफा के दमाद कलेक्टर हउअन, लइका के बाबा की मउसिआउत भाई के लइका सरकारी डाक्टर ह…आदि…बरदेखुओ के पता रहे की लइका के ए दूनू जाने (कलेक्टर अउर डाक्टर) से, गरज परले पर कवनो फायदा ना होई…फिर भी उ बरदेखुआ जब घरे जा त दाँत चिआरत लइका की ए दुनु संबंधी कलेक्टर अउर डाक्टर के बखान करे, अउर लइकी के पुरा परिवार…दाँत चिआरे…की एतना निमन लइका मिलता।…..हमरा लागता की की कहीं घुमा-फिरा के हमनी जान उ हे बरदेखुआ बानी जां….अउर माननीय मनोज तिवारी जी सहित अनेकानेक प्रभावित, भारी-भरकम कथित भोजपुरिया लोग लइका …..असलियत से काफी दूर…फलाना संसद बाने, मंतरी बाने…अरे बुरबुक एइसन मनई कवने काम के रे? जे अपनन खातिर काम ना आवे। भोजपुरिया के? एगो लमहर सवाल बा, भाईजी, बहिनजी, भउजी, भइया…..भोजपुरी में जनम ले के, ओ के अपना के, जे बड़कवा बनि गइल, (भोजपुरी, माईभाखा की किरिपा से) अगर उ कुछ भोजपुरी खातिर नइखे कइल चाहत अउर रउआँ ओके बार-बार भोजपुरिया-भोजपुरिया कहतानी त इ भोजपुरी अउर भोजपुरिया दुनु के अपमान बा… अपनी भाखा के ले के (जवन ओके एगो मुकाम तक पहुँचवले बिया) बहानेबाजी, हिला-हवाली करे वाला सत-प्रतिसत ओ भाखा में पयदा त भइल…सुरु में ओ के सम्मानो देहले होई पता नइखे पर अगर आगे चलि के उ कपूत हो जाव, अपनी माईभाखा की प्रति उदासीन हो जाव त उ केइसन भोजपुरिया जी? असली भोजपुरिया त उ बा, भले जेकरी लगे कवनो आथि-अलम नइखे फिर भी दिल से चाहता की भोजपुरी के, माईभाखा के ओकर असली सनमान मिल जाव अउर ओसे जेतना हो सकेला ओतना खातिर उ हरदम खड़ा बा। जय-जय।

पं. प्रभाकर गोपालपुरिया

Leave a Comment