भोजपुरी अध्ययन केन्द्र में राहुल सांकृत्यायन के जन्मदिन….

वाराणसी, 9 अप्रैल भोजपुरी अध्ययन केन्द्र में आज राहुल सांकृत्यायन के जन्मदिन पर उन्हें याद करकरते हुए केन्द्र के समन्वयक प्रोफ़ेसर सदानन्द शाही ने कहा  कि भोजपुरी के विकास में राहुल सांकृत्यायन के अवदान महत्वपूर्ण है। राहुल सांकृत्यायन ने भोजपुरी में आठ नाटक लिखे,भोजपुरी में अनेक लेख लिखे और भोजपुरी की रचनात्मक क्षमता का उपयोग हिंदी को बेहतर बनाने के लिए  किया . भोजपुरी को देवनागरी लिपि में लिखने की प्रेरणा भी उन्होंने ही दी थी .किसान आन्दोलन के समय बिहार में छपरा और आसपास के जिलों में किसान सभाओं में राहुल भोजपुरी में भाषण देते  थे,जिससे किसानो को उनकी बातें समझाने में आसानी हो .यही सोचकर राहुल ने भोजपुरी में एक समाचार पत्र निकालने की योजना बनायी थी .आजादी के बाद जब साक्षरता का अभियान चल रहा था ,राहुल जी का  सुझाव  था कि लोगों को उनकी मातृभाषाओं  के माध्यम से साक्षर बनाया जाये .इससे साक्षरता का लक्ष्य भी पूरा हो जाएगा और लोक भाषाएँ भी सुरक्षित रहेंगीअनुसन्धान और लेखन की तमाम योजनाओं के हाथ में रहते हुए भी राहुल जी किसान आन्दोलन में कूद पड़े .क्योंकि उन्होंने विश्व यात्राओंके क्रम में महसूस किया था कि- भारत जैसी गरीबी और कहीं नहीं है’ .राहुल जी किसानो और मजदूरों की तकलीफों से वाकिफ थे .वे यह जानते और मानते थे कि –‘निराकार स्वराज से काम नहीं चलेगा ,किसानो की साकार तकलीफों  देखकर उनमें  बुद्ध और ईसा जैसी करुणा फूट पड़ी .  वे अच्छी तरह  देख रहे थे  कि  ‘किसानों  की जय का नारा जिन लोगों ने लगाकर किसानो के वोट लिए वही मंत्रिमंडल में पंहुच कर जमीदारों की तकलीफों पर लेक्चर देने लगे हैं इसलिए राहुल अपने बौद्धिक कार्य की परवाह किये बगैर किसान आन्दोलन में कूद पड़े .अमवारी के किसान प्रतिरोध में ब्रिटिश पुलिस और सामंत सेना का मुकाबला करने जो पहला दस्त गया राहुल उसमे शामिल हुए .उन पर लाठियां बरसायी  गयी ,उनका सिर फट गया .मनोरंजन प्रसाद सिन्हा ने गीत लिखा–‘राहुल के सिर से खून गिरे फिर क्यों वह खून उबल न उठे’.राहुल की गिरफ्तारी हुयी .राहुल डिगे नहीं और संघर्ष में डटे रहे .किसानों का भारी हुजूम संघर्ष में शामिल हुआ .राहुलजी ने शब्द और कर्म की एकता की अनूठी मिसाल कायम की . राहुल सांकृत्यायन सच्चे अर्थों में जन बुद्धिधर्मी  थे ।समारोह की अध्यक्षता करते हुए प्रोफ़ेसर अवधेश प्रधान ने कहा कि राहुल सांकृत्यायन से बचपन में हमारा परिचय महान घुमक्कड़शास्त्री  के रूप में होता है. आगे चल कर उन्हें हम महापंडित के रूप में जानने लगते हैं ..वे  महान शोधकर्ता, चिन्तक और लेखक थे .तिब्बत यात्रा  की महान खोजों ने उन्हें अचानक विश्व प्रसिद्द बना दिया , लेकिन उन्होंने अपने जनपद  और भोजपुरी भाषा और लोक जीवन को हमेशा याद रखा।और भोजपुरी जैसी बोली को क्लासिक भाषाओं जैसा महत्व दिया।

 

 

  • सदानन्द शाही

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