भोजपुरी को संविधान की आठवीं अनुसूची की ओर : मनोज तिवारी

bhojpuripanchayat-manojtiwari

नई दिल्‍ली: इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में भोजपुरी को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने के साथ ही भोजपुरी साहित्य और आंदोलन के मुद्दे पर खूब जोरदार चर्चा हुई । सांसद और दिल्‍ली भाजपा के अध्‍यक्ष मनोज तिवारी ने कहा कि सरकार ने भोजपुरी को संवैधानिक मान्‍यता देने का मन पूरी तरह से बना लिया है और संसद के अगले सत्र में भोजपुरी की संवैधानिक मान्‍यता संबंधी बिल के संसद में पेश होने की पूरी उम्‍मीद है । इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में पत्रिका ‘भोजपुरी पंचायत’ द्वारा अपने प्रकाशन के पांच वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित भोजपुरी साहित्‍यांदोलन कार्यक्रम में मॉरिशस के कला व संस्‍कृति मंत्री पृथ्‍वीराज सिंह रूपन, भारत में मारीशस के उच्‍चायुक्‍त श्री जगदीश्‍वर गोवर्धन, भोजपुरी सिनेस्‍टार, लोकगायक, सांसद एवं भाजपा के दिल्‍ली प्रदेश अध्‍यक्ष मनोज तिवारी, भोजपुरी समाज दिल्‍ली के अध्‍यक्ष अजीत दुबे, सासाराम महाविद्यालय के हिंदी विभागाध्‍यक्ष गुरूशरण सिंह, बिहारी कनेक्‍ट के अध्‍यक्ष उदेश्‍वर सिंह, पूर्वांचल एकता मंच के अध्‍यक्ष शिवजी सिंह की मौजूदगी में सम्‍पन्‍न इस कार्यक्रम में भोजपुरी पत्रकारिता, साहित्‍य, संस्‍कृति, कला व सिनेमा सहित भोजपुरी से जुड़े अनेक मुद्दों पर चर्चा हुई और भोजपुरी को जल्‍द से जल्‍द संवैधानिक मान्‍यता देने की मांग भी की गई । लोकगायक, सांसद एवं भाजपा के दिल्‍ली प्रदेश अध्‍यक्ष मनोज तिवारी ने भोजपुरी की मिठास, विस्तार और समृद्धि पर बात करते हुए भोजपुरी पंचायत द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना करते रहे। उन्होंने बताया की अब वह समय दूर नहीं, जब भोजपुरी संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित कर ली जाएगी। वे ‘भोजपुरी-पंचायत’ द्वारा किये जा रहे कार्यों से अभिभूत थे। उन्होंने मंच से बोलते हुए कहा कि कुलदीप भाई का कार्य निश्चय ही सराहनीय है। ये पूरी निष्ठा एवं मेहनत से पत्रिका को निकालते हैं। उन्होंने पत्रिका के हर कार्यक्रम में आने का वादा भी किया।
भोजपुरी समाज दिल्‍ली के अध्‍यक्ष अजीत दुबे ने अपने संबोधन में कहा कि यह गौरव की बात है कि मॉरीशस सरकार ने मॉरीशस में भोजपुरी को संवैधानिक मान्‍यता प्रदान कर रखी है और अब भारत में भी वर्तमान सरकार ने भोजपुरी को संवैधानिक मान्‍यता देने का मन बना लिया है । लेकिन हिंदी के कुछ विद्वान भोजपुरी की संवैधानिक मान्‍यता की राह में रोड़ा अटकाने की कोशिश कर रहे हैं जबकि सच्‍चाई ये है कि भोजपुरी की संवैधानिक मान्‍यता से हिंदी का कोई नुकसान नहीं होने जा रहा है । उन्‍होंने कहा कि भोजपुरी का हिंदी से कोई विरोध नहीं है ।
इस अवसर पर मॉरीशस के कला व संस्‍कृति मंत्री पृथ्‍वीराज सिंह रूपन तथा भारत में मारीशस के उच्‍चायुक्‍त श्री जगदीश्‍वर गोवर्धन ने भारत और मारीशस के प्रगाढ़ आपसी संबंधों तथा एक समान भाषा, संस्‍कृति, परम्‍परा और रीति-रिवाजों को याद करते हुए कहा कि हमारी जड़ें भारत में हैं और हमारा सौभाग्‍य है कि हमें यहां पर इतना मान-सम्‍मान प्रदान किया जाता है ।

सासाराम महाविद्यालय के हिंदी विभागाध्‍यक्ष गुरूशरण सिंह ने भोजपुरी के विकास और समृद्धि में पत्र-पत्रिकाओं के योगदानो की चर्चा करते हुए अनवरत रूप से ‘भोजपुरी-पंचायत’ का निकलना अनुकरणीय और सराहनीय है। बिहारी कनेक्‍ट के अध्‍यक्ष उदेश्‍वर सिंह ने विश्व स्तर पर भोजपुरी के कार्यक्रमों के आयोजनों की चर्चा करते हुए पत्रिका के योगदानों की सराहना करते हुए भोजपुरी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। पूर्वांचल एकता मंच के अध्‍यक्ष शिवजी सिंह ने बताया कि भोजपुरी केवल भाषा ही नहीं, एक संस्कृति है। विश्व भोजपुरी सम्मलेन के आयोजन द्वारा उनका यही प्रयास रहता है कि भाषा और संस्कृति की समृद्धि हो। इसमें साहित्यिक रूप से चर्चाओं और कवि-सम्मेलनों का आयोजन अनुकरणीय है। इसी क्रम में पत्रकार व ‘भोजपुरी संसार’ के संपादक मनोज श्रीवास्‍तव ने भी भोजपुरी से जुड़े विभिन्‍न मुद्दों पर अपने विचार रखते हुए भोजपुरी पंचायत की कल्पना और उसके अनवरत सफर पर विषय-परिवर्तन के रूप में विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की। सबने अपने-अपने पक्षों द्वारा भोजपुरी साहित्य की समृद्धि और इसके संवैधानिक सम्मान के लिए होते रहने वाले आंदोलनों पर विस्तृत विचार प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम में आये अतिथियों का स्वागत भोजपुरी पंचायत के संपादक कुलदीप श्रीवास्तव ने किया। जहाँ चर्चा सत्र का संचालन प्रो गुरुशरण सिंह ने किया वही बाकी सत्र का सञ्चालन व धन्यवाद ज्ञापन केशव मोहन पाण्डेय ने दिया। केशव मोहन पाण्डेय ने पत्रिका के साहित्यिक पक्ष को प्रस्तुत करते हुए बताया कि पत्रिका में भोजपुरी साहित्य की समृद्धि के लिए लगभग सभी विषयों पर साहित्यकारों के विचारों को प्रस्तुत किया जाता है। इसमें भाषा और संस्कृति के हर पक्ष पर विचार प्रस्तुत किया जाता है। पत्रिका में भोजपुरी साहित्यकारों को भरपूर मौका दिया जाता है और उनके बारे में जानकारी भी प्रस्तुत किया जाता है।

Leave a Comment