भोजपुरी लोक कला आ देशज ज्ञान के इन्वर्सिटी !

भोजपुरी हिन्दी प्रदेश के हृदय केन्द्र में मौजूद अइसन नाड़ी बा जवन उत्तर प्रदेश के बनारस-गोरखपुर से लेके आरा-छपरा तक फइलल बा। एकर विस्तार कलकत्ता, बम्बई, दिल्ली जइसन महानगरन  तक बा. काहें से कि पुरबिया लोग रोजगार खातिर देश के बहुत जगह में जाके बसल बाड़े। अपना देश के बाहर भी फिजी, ट्रिनिडाड, सूरीनाम, अउर मारीशस से लेके हालैण्ड आ दक्षिण अफ्रीका ले लाखन के संख्या मे भोजपुरी क्षेत्र के लोग जाके आपन भाषा, संस्कृति के विस्तार देले बाड़े। एह देसन के साथ भारत के संबंध मजबूत बनावे में भी भोजपुरी भाषी लोगन के बहुत हाथ बा। भारत के एक प्रदेश से दोसरा प्रदेश के बीच एकता कायम करे में एह लोगन के भारी योगदान बा।

भोजपुरी क्षेत्र के गौरव के रूप में काशी नगरी बा जहवाँ गौतमबुद्ध, शंकराचार्य, रामानन्द, बल्लभाचार्य, रैदास, कबीर, तुलसी, भारतेन्दु हरिश्चन्द्र, जयशंकर प्रसाद, प्रेमचन्द, रामचन्द शुक्ल, त्रिलोचन, नजीर बनारसी, किशन महराज, विस्मिला खाँ जइसन विभूति अपने ज्ञान-विज्ञान, कला से देश दुनिया के प्रभावित कइले बाड़े।

सन् 1857 के पहिली आजादी के लड़ाई में भोजपुरी क्षेत्र के गाँव-गाँव से अनगिनत लोग भाग लेले रहले। ओह लड़ाई के नायक के रूप में मंगल पाण्डेय, वीर कुँवर सिंह आपन तन मन धन के कवनो परवाह ना कइके देश के जनता में आजादी के जोश जगवले। सन् 1942 के भारत छोड़ो आन्दोलन में कई जगह पर अंग्रेजी सेना के हार मानिके भागे के पड़ल। बलिया त चौदह दिन खातिर आजाद भी हो गइल रहे। आजादी के लड़ाई के बाद भी बाबू राजिन्दर परसाद, जय प्रकाश नरायण, डा0 भगवानदास, श्री प्रकाश जी, संपूर्णानंद, लाल बहादुर शास्त्री, बाबू जगजीवन राम, कमलापति त्रिपाठी, राजनारायण जी अउर चन्द्रशेखर जी जइसन राजनीतिज्ञ  भोजपुरी क्षेत्र के नाम रोशन कइले । महापंडित राहुल सांकृत्यायन से लेके आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी ले  कई बड़-बड़ साहित्यकार विद्वान एह क्षेत्र में पैदा भइलन। संस्कृत भाषा साहित्य के त ई क्षेत्र गढ़ ह। पंडित रघुनाथ शर्मा से लेके आचार्य बलदेव उपाध्याय तक देश-विदेश में बहुत लोग अपना ज्ञान से सबके प्रभावित कइले बाड़े।

एकरे अलावा चित्रकला, मूर्तिकला, संगीत, हस्तशिल्प अउर कारीगरी में इहवाँ के बनावट के विशेष छाप मौजूद बा। गरीबी, बेरोजगारी के बादो शिक्षा आ कला के क्षे़त्र में भोजपुरी अंचल हमेशा आगे रहल बा।

भोजपुरी क्षेत्र के लोक साहित्य बहुत समृद्ध बा। लोकगीत, गाथा, कहावत, लोककथा, व्रतकथा अउर लोकगीत के त इहाँ बड़ खजाना बा। भिखारी ठाकुर जइसन कलाकार अपना नाटक खातिर घरे-घरे जानल जाले। रामलीला-रासलीला के कार्यक्रम त एह क्षेत्र में सालो भर चलेला । भोजपुरी क्षेत्र लोककला आ लोकविद्या के गढ़ मानल जाला। महेन्दर शास्त्री, धरीछन मिसिर, मोती बी.ए., चतुरी चाचा, रामेश्वर सिंह कश्यप, विवेकी राय,चंद्रशेखर मिश्र, शारदा सिन्हा, स्वामी विमलानन्द सरस्वती, रामजियावन दास बावला, पंडित हरिराम द्विवेदी, जइसन लोग अपना साहित्य अउर कला से सबके प्रभावित कइले बाडे।

भोजपुरी में  कईगो पत्रिका निकलत बाड़ी स। कईगो साहित्यिक-सांस्कृतिक संगठन  भोजपुरी में काम कर रहल  बाड़े। अब जरूरत बा कि भोजपुरी से संबंधित जवन चीज छितराइल बा सबके बटोरि के ओकर साहित्यिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक, सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक अध्ययन कइके ओकरा पर नया खोज कइल जा। भोजपुरी समाज अब्बो बहुत पिछड़ल बा। एह समाज के पिछड़ापन, गरीबी, अशिक्षा के दूर करे खातिर हमनी के मिलि-जुलि के प्रयास करेके पड़ी। कवनो भाषा के विकास ओकरे समाज के विकास से जुड़ल बा।इ सोचल जा कि समाज पिछुआ जा आ भाषा आगे बढ़ी जा त इ ना हो सकेला .

कबीर आ उनके अइसन भोजपुरिया संतन के बानी काम करे वाली जनता के भीतर के आवाज ह। भोजपुरी के असर दुनिया के कई देसन में देखात बा। ओकरे मूल में एह क्षेत्र के मजदूर बाड़े। एह क्षेत्र के किसान-मजदूर अपना मेहनत के बल पर माटी के सोना बनावे में योगदान देले बाड़े। भोजपुरी के इज्जत मजदूर-किसान भाई लोग के ताकत के इज्जत ह। भोजपुरी मेहनत अउर ताकत के भाषा ह। भोजपुरी लोकगीत में त किसान-मजदूर के रोज के जिनिगी के व्यवहार के बात बा। भोजपुरी लोकगाथा में कठिन से कठिन परिस्थिति में भी धीरज के कथा बा। मेहनत अउर ताकत के साथ कईगो राग-आनन्द, हुलास, प्रेम, विरह, करुणा सब कुछ भोजपुरी साहित्य में मौजूद बा। ओकरे सौंदर्य के देखे-परखे आ जाने खातिर कईठो उपाय करेके परी।

भोजपुरी क्षेत्र के आपन बड़ सांस्कृतिक विरासत बा। ओह थाती के जाँच-परखि के सुरक्षित राखे के प्रयास करेके होई। ओह विरासत के प्रचार-प्रसार खातिर जुटे के होई। ईहो कोशिश करेके होई कि ओह में का नया जोड़ल जा सकेला। भोजपुरी भाषा अउर साहित्य के जतना लिखल आ प्रकाशित रूप बा, ओकरा हजार गुना साहित्य लोगन के जबान में बा। एह में भोजपुरी समाज के इतिहास सुरक्षित बा। ओह इतिहास के प्रकाशित रूप में सबके सामने ले अइला पर हमनी के बहुत कुछ सीख मिली।

भोजपुरी भाषा के कई रूप पावल जाला। सब रूप के अध्ययन करे के खातिर भोजपुरी भाषा सर्वेक्षण पर भी काम होखे के चाही।  भोजपुरी भाषा अउर जीवन शैली के सांस्कृतिक विभिन्नता उजागर करे खातिर भोजपुरी कला के रूप में भी इकट्ठा कइल जरूरी बा। एकरा खातिर एगो भरल पूरल संग्रहालय बनावल जरूरी बा।

इलेक्ट्रानिक मीडिया, फिल्म-निर्माण, विज्ञापन आ फिल्म निर्माण के क्षेत्र में बहुत काम कइले के संभावना बा। भोजपुरी काम करे खातिर ट्रेनिंग के इंतजाम करे के परी.एकरा खातिर एगो सोगहग भोजपुरी परिवार बसावे आ बनावे के परी .भोजपुरी इलाका से दुनिया भर में जेतना लोग गइल बाड़े उनके जोड़े के परी .एकरा  खातिर सूचना केन्द्र बना के ओ लोग के भोजपुरी क्षेत्र के विकास से जोड़े के परी।

एगो अऊर बाति इ बा कि भोजपुरिया लोग बहरा जाके खूब   काम करेला. धरती के स्वर्ग बना देला  .बाकी अपना भोजपुरी इलाका में अइसहीं बदहाली बनल रही .एगो खिस्सा इयाद आवता .एगो बानर रहे .बरसा के दिन में खूब पानी बरसल रहे .ऊ पेड़वा प बइठल कांपत रहे.ओहि पेड़वा  प एगो  बया आपण घोसला बनवले रहे . ऊ बनरा  से पूछलस ए नर नरई/हाथ गोड अछइत/जाड़े कहें मरइत.बनरा खिसिया गइल  आ बया के घोसला नोच नाचि देलस .हमहन के खिसिअइला के जउरत नइखे .हमहन के इ सोचेके बा कि हाथ गोड भी बा ,दिल दिमाग भी बा ,जगह जमीं नदी तालाब सब बा. तबो भोजपुरी इलाका के हालात काहें खराब बा.हम अपना

इलाका के काहें ना बदल सकीलें .हमके इ बुझाला कि एमे कुछ त हमहन के दोस बा आ कुछ हमन के शिक्षा के दोस बा .हमन के ऐसन शिक्षा के फेरा में परि गइल बानि जा कि आपने जगह  जमीन से  कट गइल बानी  जा .जवन हमहन के देशज ज्ञान बा ओसे कटि गयल बानी जा .एके बदले के परी .देशज आ जनपदीय  ज्ञान के बहुत उपेक्षा भइल .आबो से चेतल जा .ए ओर ध्यान दियाव .भोजपुरी क्षेत्र के इन्वर्सिटीन में लोक विद्या के विभाग खोलल जा .आ हो पावे त अपने  बोली बानी में एगो एइसन इन्वर्सिटी खोलल जा  जवना में एह इलाका के संस्कृति ,साहित्य संसाधन आ ओकरे विकास के बाति सिखल पढ़ल जा सके . कर्नाटक में अइसन हो सकेला त बनारस में भा गोरखपुर में काहे न हो सके .

 

  • सदानंद शाही

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