रानी चटर्जी पर सवाल तो ऐश्वर्या राय पर क्यों नहीं?

एक नहीं तीन-तीन दादा साहब फाल्के अवार्ड….. सवाल केवल रानी-पवन पर ही क्यों? ऐश्वर्या राय पर क्यों नहीं? रानी चटर्जी पर सवाल तो ऐश्वर्या राय पर क्यों नहीं? पवन सिंह पर सवाल तो राम रहीम/हेमामालिनी/जावेद अख्तर जी पर सवाल क्यों नहीं? इनको भी भारत सरकार के अल्वावे और कोई दादासाहेब फाल्के अवार्ड नहीं लेना चाइये नहीं ही जाना चाइये…..

हर तरफ गड़बड़ घोटाला है भाई…..हर कोई मुखौटा पहन कर निकलता है….. गजब दोगलापन है भाई…..आप आलोचना करो….खूब करो….भोजपुरी स्टारों के लिए अलग मापदंड और हिंदी फिल्मों के स्टारों के लिए अलग मापदंड…..यह दोगलापन नहीं तो और क्या है……

तीन संस्थाओ द्वारा दादा साहब फाल्के अवार्ड प्रदान किया जाता है:-

  • भारत सरकार द्वारा हर साल….
  • दूसरा ‘दादा साहब फाल्के एक्सीलेंस अवार्ड २०१७’ – जो इस साल २१ अप्रैल २०१७ को शाम ६ बजे से शुरू होकर देर रात तक चला…..जहाँ ऐश्वर्या राय बच्चन, जावेद अख्तर, हेमामालिनी जी, जीनत अमान सहित बहुत सारे हिंदी सितारों को यह अवार्ड प्रदान किया गया और शरीक हुए……
  • तीसरा ‘दादा साहब फाल्के फाउंडेशन अवार्ड’ – जो 7 मई २०१७ को मुंबई में ही संपन्न हुआ, जहाँ कुछ भोजपुरी फिल्मों स्टारों को सम्मानित किया गया…..

यही ‘दादासाहेब फाल्के फाउंडेशन’ संस्था राम रहीम की ‘एमएसडी: द massenger’ को बेस्ट हिंदी फिल्म का अवार्ड प्रदान करती है तो हमारे फेसबुक कलमवीरों की कलम में जंग क्यों लग जाती है? जब भोजपुरी फिल्म स्टारों को एक ‘दादासाहेब फाल्के फाउंडेशन अवार्ड’ देती है तो आप जमकर उनकी खिंचाई करना शुरू कर देते हो?

देश के जाने माने पत्रकार और बड़े भाई शशिकान्त जी फेसबुक पर लिखते हैं….’उन्हें (रानी चटर्जी) दादा साहब फाल्के पुरस्कार के नाम पर दूसरा दादासाहब फाल्के पुरस्कार दे दिया गया तब भी रानी चटर्जी दांत चियार कर हंस रही हैं। धन्य हो रानी जी द क्वीन ऑफ भोजपुरी सिनेमा’…….

मगर २१ अप्रैल को मिस वर्ल्ड ऐश्वर्या राय बच्चन जी को ‘दादा साहब फाल्के एक्सीलेंस अवार्ड २०१७’ से नवाजा गया…..तब सभी कलमवीर चुप रहे……आखिर क्यों….बड़े भाई शशिकांत सर की भी कलम दगा क्यों दे गई? यह समझ के पड़े है…… भोजपुरी फिल्मों की क्वीन…. की आलोचना जायज है तो ‘ऐश्वर्या राय बच्चन जी’ की क्यों नहीं? क्या ऐश्वर्या राय बच्चन जी भी अनपढ़ है….जैसे आप कलमवीर बोलते रहते हो?

भोजपुरी फिल्म के चहेता हीरो पवन सिंह की जमकर आलोचना कर रहे हो…..आप लोग करो…..पर जब राम रहीम सर को यही संस्था अवार्ड देती है तो आपकी कलम आपका साथ क्यों छोड़ देती है……यह दोहरा मापदंड नहीं है तो क्या है??

भोजपुरी इंडस्ट्री से जुड़े लोगों से यही कहना है…..आप लोगों की जिस दिन आलोचनाएं होनी बंद हो जायेगी….इसका मतलब आप सभी बेकार हो….किसी के नोटिस में नहीं आ रहे हो….आलोचनाओं से सबक लेते हुए अपने काम में सुधार लाते रहे हो….सुधार हो भी रहा है….. मेकिंग पर आप लोग ध्यान देने लगे हो….साउथ के डीओपी के साथ काम कर रहे हो….स्क्रीन प्ले के साथ कहानी पर भी अच्छा सुधार देखने को मिल रहा है……अब आप सबको गारी/आलोचनाएं सुनने की आदत डालने की जरूरत है….क्योंकि कुछ कुछ भोजपुरिया कलमबीरों को नकारात्मक आलोचना करने की ही आदत बड़ गई है….इन्हें अच्छाई से कुछ भी लेना-देना नहीं…..जय-जय।

Aishwarya-Rai-Bachchan-honoured-with-the-most-prestigious-Dadasaheb-Phalke-award-for-Sarbjit-1

Leave a Comment