राम जियावन दास ‘बावला’ के दू गो गीत

पग पग धरती सिवनवा क नापइ

देहियाँ क सुधि नाहीं फटहा झिंगोला।

 

तपनी थिथोर होय सँझवा के दर दर

बुढ़ऊ क कहनी सोहाय भर टोला।

 

उँखिया क रस कोल्हुवड़वा बोलावइ

गुड़वा सोन्हाय त उमगि जाय चोला।

 

गँवई क गाँव जहाँ दिन भर चाँव माँव

धूरिया लपेट के फिरैलैं बम भोला।।

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शुभ-शुभ-शुभ नया साल हो

 

बासल बयार ऋतुराज क सनेस देत

गोरकी चननिया क अँचरा-गुलाल हो

 

खेत-खरिहान में सिवान भरी दाना-दाना

चिरईं के पुतवो ना कतहूँ कँगाल हो

 

हरियर धनिया चटनिया-टमटरा क

मटरा के छेमिया के गदगर दाल हो

 

नया-नया भात हो सनेहिया के बात हो

एहि बिधि शुभ-शुभ-शुभ नया साल हो।

 

लेखक परिचय:-

नाम: राम जियावन दास बावला

जनम: 1 जून 1922, भीखमपुर, चकिया, चँदौली, उत्तर प्रदेश

मरन: 1 मई 2012

रचना: गीतलोक, भोजपुरी रामायण (अप्रकासित)

 

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