सबरंग, लोकरंग के वाहक भोजपुरी पंचायत

कुलदीप कुमार@bhojpuripanchayat.in

‘भोजपुरी पंचायत’ में भोजपुरी की है आत्मा बसती,
इसमें लोक संस्कृति, लोकरंग की कोयल है कू-कू करती,
यह सिपाही है भोजपुरी समाज, संस्कृति और विरासत की,
इसमें हमारी मातृभाषा भोजपुरी महकती, चहकती, गमकती।
प्रणाम। राम-राम। जय मातृभाषा। जय भोजपुरी। जय-जय भोजपुरी पंचायत। जी हाँ। भोजपुरी पंचायत ने अपने कर्मपथ पर अनवरत अग्रसर रहते हुए चार वर्ष की सार्थक, समयोचित यात्रा पूरी कर ली है। चार वर्ष की यह छोटी बाला है तो छोटी, पर बड़े-बड़े काम करके भोजपुरी की बगिया को महका रही है, भोजपुरी लोकरंग, संस्कृति, भाषा का रसास्वादन भोजपुरियों के साथ ही अभोजपुरियों को भी करा रही है और इतना ही नहीं देश के साथ ही विदेशों में भी यह धूम मचा रही है, नए-नए पाठकों को जोड़ते हुए अपनी उम्र बढ़ाने के साथ ही अपने परिवार को भी पूरी तरह से समृद्ध करते जा रही है। भोजपुरी पंचायत ने अब तक के अपने सभी अंकों में मजबूती के साथ, सार्थकता के साथ, समय की माँग को देखते हुए भोजपुरी की जड़ को खाद-पानी दिया है, भोजपुरी के विशाल वृक्ष को और पल्लवित, पुष्पित किया है तथा भोजपुरी के दर्शन, संस्कृति, लोक परंपराओं, लोक कथाओं, लोक रागों, लोक जीवन आदि से अपने सुधी पाठकों को गंभीरता के साथ, रोचकता के साथ, ज्ञानवर्धन के साथ परिचय कराया है और भोजपुरी समाज का एक अभिन्न अंग बनाते हुए भोजपुरी समाज का मान बढ़ाया है। इस पत्रिका ने समयोचित रूप से भोजपुरी तीज-त्योहारों छठ आदि के साथ ही पारंपरिक गीतों कजरी आदि को गुनगुनाया है तथा साथ ही नारी सशक्तिकरण की बात भी प्रमुखता से रखते हुए नारी शिक्षा, सर्व शिक्षा पर लोगों का ध्यान आकर्षित कराया है। इतना ही नहीं समाज, राजनीति आदि से संबंधित सामयिक मुद्दों को भी पूरजोर तरीके से उठाया है। भोजपुरी के कलमकारों को ससम्मान जगह देते हुए भोजपुरी सिनेमा भी इससे अछूता नहीं रहा है तथा भोजपुरी सिनेमा की दशा और दिशा पर बेबाकी से अपनी बात रखते हुए इसकी श्लीलता और अश्लीलता पर भी वरिष्ठ भोजपुरियों की बात से सभा-समाज को अवगत कराया है।
पत्रिका का प्रकाशन ही भोजपुरी को भोजपुरियों के साथ ही अभोजपुरियों के समक्ष मजबूती से प्रस्तुत करने के लिए, भोजपुरी समाज, संस्कृति, समस्याओं को प्रकट करते हुए, उन पर विचार-विमर्श करते हुए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की मूल-भूत बातों, मुद्दों, समाधानों आदि पर विचार करने के लिए किया गया था। इस पत्रिका के पहले अंक का विमोचन सन 2012 में मारिशस में किया गया था। इतना ही नहीं पत्रिका ने अपने एक अंक में ‘माॅरिशस: खेतों से सत्ता तक गिरमिटिया मजदूर’ पर आवरण कथा प्रस्तुत करके भोजपुरी गिरमिटिया मजदूरों की ईमानदारी से किए गए कड़े परीश्रम से उनके रंक से राजा बनने की कहानी भी प्रस्तुत करते हुए विदेश में बसे भोजपुरियों के जज्बा, ईमानदारी, कड़ी मेहनत को भी सलाम किया है। केवल, क्षेत्र स्तरीय, राष्ट्र स्तरीय बातों, विचारों, मुद्दों की ही बात न करते हुए
भोजपुरी पंचायत ने प्रमुखता से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपने को प्रमाणित किया है। पत्रिका ने हर उस सामयिक मुद्दे को भी गंभीरता से उठाया है जो भोजपुरी और भोजपुरियों से जुड़ा हुआ हो। इसने संत कबीर की बानी को गाया है तो भिखारी ठाकुर के कर्म-मर्म को पहचाना है। इतना ही नहीं इसने खाटी भोजपुरिया डाॅ. राजेंद्र प्रसाद जैसे महापुरूषों को सादर नमन करते हुए भोजपुरियों में भोजपुरिया स्वाभिमान को जगाया है। भोजपुरी परंपरा, विरासत को और भी समृद्ध किया है।
आज के समय में भोजपुरी पंचायत किसी परिचय की मुहताज नहीं रही। इसका डंका चहुँओर बज रहा है एवं इसके तराने हर इसके पाठकों के जुबां पर धमाल मचाए हुए हैं। इस सार्थक पत्रिका को पाठक वर्ग ने सिरमौर बनाया है, इसके साथ रोया है, गाया है और साथ ही इसके विचारों पर विचार करते हुए समाज, देश को नई सार्थक दिशा में आगे बढ़ाया है। भोजपुरी पंचायत ने समय-समय पर पुरजोर तरीके से भोजपुरी को आधिकारिक भाषा का दर्जा देने का मुद्दा भी उठाया है और सरकार, प्रशासन के साथ ही पाठकों को हर तरह से समृद्ध भोजपुरी भाषा से परिचय कराया है।
अति प्रसन्नता के साथ भोजपुरी पंचायत अपने सुधी पाठकों को बता रहा है कि यह अपने 4 वर्ष की अनवरत यात्रा को समारोह “सबरंग समारोह” के रूप में 3 सितंबर को शाम 5 बजे, नवीन भाई ठक्कर आडिटोरियम, विले-पार्ले (पूर्व), मुंबई में मनाने जा रहा है, जिसमें देश-विदेश के सम्मानित भोजपुरियों, इसके पाठकों के साथ ही भोजपुरी एवं हिंदी से जुड़ें तमाम फिल्मी कलाकार भाग लेंगे एवं अपनी मनोरम प्रस्तृति से इस समारोह में चार चाँद लगाएंगे। भोजपुरी पंचायत टीम आप सभी सुधी पाठकों को भी इस समारोह में अपनी सादर उपस्थिति से चार चाँद लगाने के लिए सादर आमंत्रित कर रही है।
भोजपुरी पंचायत नजरें बिछाए, आपका कर रही है इंतजार, आपके कदम रखने से यह समारोह हो जाएगा शानदार।
आईं, जरूर आईं अउर ए सानदार, गरिमामय, मनोरंजनपूर्ण समारोह के यादगार बनाईं। जय मातृभाषा। जय भोजपुरी पंचायत।

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