हाय कब ले भरम से तरी आदमी

डाॅ. रामरक्षा मिश्र विमल

हाय कब ले भरम से तरी आदमी

हाय कब ले भरम से तरी आदमी
जिंदगी से दिलग्गी करी आदमी

राह पर ना चले के कसम खाइके
राह कबले देखावल करी आदमी

राह छूटल त दर दर भटकि बा रहल
कब ले परयोग आउर करी आदमी

ताख पर लाज लेहाज कब ले धरी
जानवर से भवद्दी करी आदमी

बारके हर गली में दिया नेह के
ए ‘विमल’ कब अन्हरिया हरी आदमी
मन इ जब जब उदास होखेला

मन इ जब जब उदास होखेला
तोहरे आस-पास हो लेला

घर धुँआइल बा आँख लहरेला
जब भी बुधुआ किताब खोलेला

तोहरा के भुला सकबि कइसे
आजुओ मन लुका के रो लेला

चोर भइलीं भलाई ला जेकरा
ऊहे हमरा के चोर बोलेला

मेहरी से पिटाके मुसकाले
हारि अपनन से केहू बोलेला ?

दोष कइसे विमल के दे दीं जी
देखि लछिमी कबो ना डोलेला
संपर्कः-
द्वाराः- संदीप मजुमदार, 3 नं. लिंक रोड , उत्तरायन, निकटः- बंधु महल क्लब, पोस्ट- बंगाल इनेमल, जिला- 24 परगना (नार्थ),
पश्चिम बंगाल, पिन- 743122 , मोबाइल 09831649817
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