निनानबे के चक्कर

निनानबे के चक्कर

निनानबे के चक्कर। सुनले बानी की ना? अरे जरूर सुनले होखबि। सुनलहीं होखबि। सुनलहीं का, रउओं कहत होखबि की फलनवा निनानबे की चक्कर में पड़ी गइल बा। अउरी हाँ जे पड़ी गइल ए निनानवे की चक्कर में ओकर भूखी-पियासी मरी जाला। आराम ओकरा के हराम लागेला अउरी सुतले के उ बेमारी समझेला। अरे एतने ना, दिन-रात, साँझि-बिहान बस निनाबे के सव बनवले में लागल रहेला। इहां सव के मतलब सौ से बा, सव (मिरतक) से…

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भोजपुरिया के? एगो लहमर सवाल बा……

भोजपुरिया के? एगो लहमर सवाल बा……

भोजपुरिया के? भोजपुरिया के?ए पर अइले से पहिले एगो बिरतांत सुना देहल चाहबि। हमरा मोन परेला की पहिले जब बरदेखुआ आवे (आवेंसन) त लइका के केहू करीबी ओ बरदेखूअन से कहे की लइका की मामा की चचिआउत फूफा के दमाद कलेक्टर हउअन, लइका के बाबा की मउसिआउत भाई के लइका सरकारी डाक्टर ह…आदि…बरदेखुओ के पता रहे की लइका के ए दूनू जाने (कलेक्टर अउर डाक्टर) से, गरज परले पर कवनो फायदा ना होई…फिर भी उ…

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एगो भोजपुरिया के चिट्ठी – माननीय पीएम जी की नावे

एगो भोजपुरिया के चिट्ठी – माननीय पीएम जी की नावे

आदरणीय पीएमजी, सादर नमस्कार। इ सही बात बा की देस की सामने बहुत बड़हन-बड़हन समस्या मुँह बवले खड़ा बानीसन। बहुत सारा चुनौती बा रउरी सामने। रउआँ अपनी ओर से पूरा परयासो करतानीं। हँ, हो सकेला की राउर सोंच अउर काम कइले के तरीका अलग होखे, पर देस खातिर कुछ कर गुजरे के बा, देस के आगे ले जाए के बा, रउरी ए परयास,मेहनत पर हमरा कवनो सक-सुबहा नइखे। रउआँ अपनी हिसाब से सही काम क रहल…

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