समाजवाद की नूरा कुश्ती

समाजवाद की नूरा कुश्ती

का ज़माना आ गयो भाया, समाजवादियों की नूरा कुश्ती ने तो कार्टून चैनलों के टी आर पी की वाट लगा दी . वैसे भी वर्ष के प्रथम माह में कार्टून चैनल देखने वालो विदेश यात्रा पर चले जाते हैं , वो भी बिना किसी पूर्व सूचना के . बेचारे चैनल वाले , उनकी स्थिति तो सांप छछुंदर वाली हो जाती है . बचे – खुचे उस राशि वाले नूरा कुश्ती देखने में मस्त हैं ,…

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त्यौहार और परिवार

त्यौहार और परिवार

अपना देश त्योहारों का देश है । यहाँ जितनी जन जातियां है उनसे ज्यादा त्यौहार मनाये जाते है । पर जहाँ तक मैं समझी हूँ त्यौहार अपने देवी देवताओं के काल से चले आ रहे हैं । या उनसे सम्बंधित कोई लीला पर निर्भर है हर त्यौहार । या किसी महान सन्त के जन्मदिन को एक त्यौहार के रूप में मनाया जाता है । कबीले वालों की अपनी सोच अपनी धारणायें होती है । कुदरत…

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काहे को करूं श्रृंगार रे सखिया

काहे को करूं श्रृंगार रे सखिया

काहे को करूं श्रृंगार रे सखिया बालम जो परदेसवा में बा कौन निहारेगा  नाक के नथुनी, कौन निहारेगा आंख के कजरा कौन निहारेगा माथे की बिंदिया काहे को करूं श्रृंगार रे सखिया किसी को सुनाऊंगी ना कोयल सी बोली बन के रहूंगी मैं एक भोली मन मचलाऊंगी ना बाहों की पँखिया काहे को करूं श्रृंगार रे सखिया सब बतियाऊंगी दिलवा के बतिया आएंगे जो साजन ,सेजिया पर रतिया चाहूंगी मैं प्यार, हार नहीं नौलखिया काहे…

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हँसियो उधार हो गइल

हँसियो उधार हो गइल

कइसन कवन पेंच फँसल भइया भरल घाव जियतार हो गइल ॥ इहवाँ हँसियो उधार हो गइल ॥   अनकह जथारथ मनहीं न भावे करनी बिना बस बख़रा गिनावे देखs दिनही अन्हार हो गइल ॥ इहवाँ हँसियो…..   पसरल अंजोरिया दियरी लजाले बीच मझधार मे डेंगिया भुलाले मलाहो क मति बेजार हो गइल ॥ इहवाँ हँसियो….   मीन मेख हेरल निहारल लुगरी सपना भइल अब टहटह पियरी चकती उहेरल ब्योपार हो गइल ॥ इहवाँ हँसियो….  …

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गीतिया सखि रे हम कइसे आजु गाई

गीतिया सखि रे हम कइसे आजु गाई

गीतिया सखि रे हम कइसे आजु गाई ! माइ छठि हे माइ, कइसे हम मनाई !! ताल ना शबद – पद, लय कहाँ पाई ! मुढ़-मति बानी, कइसे के गोहराई !! कहाँ सखि रे हम,शरधा फुल पाई !! !! मधि भवरवां फुल, छत- विछत कइले ! परल जहर फल, साग बिषरस भइले ! दूषित माखन भोग, कइसे हम लगाई !! नदिया-तलइयां दूषित, जल-पत्तर! देहिया पवितर बा,मइल मन- अंतर !! देव सुरुज देव, कइसे अरघ दियाई…

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राम जियावन दास ‘बावला’ के दू गो गीत

राम जियावन दास ‘बावला’ के दू गो गीत

पग पग धरती सिवनवा क नापइ देहियाँ क सुधि नाहीं फटहा झिंगोला।   तपनी थिथोर होय सँझवा के दर दर बुढ़ऊ क कहनी सोहाय भर टोला।   उँखिया क रस कोल्हुवड़वा बोलावइ गुड़वा सोन्हाय त उमगि जाय चोला।   गँवई क गाँव जहाँ दिन भर चाँव माँव धूरिया लपेट के फिरैलैं बम भोला।। —————————   शुभ-शुभ-शुभ नया साल हो   बासल बयार ऋतुराज क सनेस देत गोरकी चननिया क अँचरा-गुलाल हो   खेत-खरिहान में सिवान…

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डीडीसीए मानहानि ममिला

डीडीसीए मानहानि ममिला

डीडीसीए मानहानि ममिला में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत आम आदमी पार्टी के अवुरी नेता के खिलाफ आज पटियाला हाउस कोर्ट आरोप तय क दिहलस। ए ममिला में अरविंद केजरीवाल आ अवुरी आरोपी अपना ऊपर लागल आरोप के खंडन कइले अवुरी ए मामला में ट्रायल के मांग कइले। अदालत ए मामला में अगिला सुनवाई 20 मई के करी। मालूम रहे कि, अरविंद केजरीवाल अरुण जेटली प दिल्ली अवुरी जिला क्रिकेट एसोसिएशन (डीडीसीए) में भ्रष्टाचार…

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भोजपुरी भाषा का संसद के दरवाजे पर दस्तक

भोजपुरी भाषा का संसद के दरवाजे पर दस्तक

भोजपुरी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची मे सम्मिलित कराने हेतु भिन्न भिन्न समय पर अनेक विभूतियों ने अपने तरीके से मातृभाषा भोजपुरी के लिए अपनी आवाज बुलंद की । भोजपुरी भाषा की मान्यता के लिए आजादी के पूर्व से ही आवाज उठाने लगी थी । बिहार विश्वविद्यालय मुजफ्फरपुर के भोजपुरी विभागाध्यक्ष डा० जयकान्त सिंह जय का मानना है कि भोजपुरी भाषा, संस्कृति, क्षेत्र और जनता का विकास निमित्त भोजपुरी आंदोलन 1940 ई० में जनपदीय…

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“इटली वाली पंचर साइकिल , कहाँ चलाई होरी मे” के साथ गाजियाबाद कम्पुटर असोशिएशन का होली मिलन सम्पन्न

“इटली वाली पंचर साइकिल , कहाँ चलाई होरी मे” के साथ गाजियाबाद कम्पुटर असोशिएशन का होली मिलन सम्पन्न

गाजियाबाद कम्पुटर असोशिएशन द्वारा आहूत होली मिलन सह काव्योत्सव का आगाज आज होटल रेडवरी अंबेडकर रोड मे आज दिनांक 11/03/2017 को सफलता पूर्वक सम्पन्न हुआ । कम्पुटर असोशिएशन द्वारा आए हुये सभी मेहमानो के स्वागत के साथ कार्यक्रम का आगाज हुआ । सम्मानित होने वाले मेहमानो मे श्री राम किसोर अग्रवाल , श्री गोपी चंद और श्री अशोक चावला जी का प्रतीक चिन्ह और शाल भेंट कर असोशिएशन के पदाधिकारियों और कम्पुटर व्यापारियों द्वारा किया…

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मोर दुवरिया अइहें ना

मोर दुवरिया अइहें ना

मइया भारती के संस्कार के पुजरिया मोर दुवरिया अइहें ना ॥ करिहें देश रखवरिया , मोर दुवरिया अइहें ना ॥   सीमवाँ पर दीहें आपन जनवाँ लुटाई हर घरी देश खातिर छतिया सजाई । उनुके से लउकत टह टह अंजोरिया मोर दुवारिया अइहें ना ॥ करिहें…………   देश से गुलमिया के दीहने मेटाई बिना गिनले आपन सिरवा कटाई काँपत दुसमन देखी भगत के तेवरिया मोर दुवरिया अइहें ना ॥ करिहें…………   सुखदेव भगत सिंह राजगुरु…

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