इस होली के रंग में

इस होली के रंग में

मैने तन-मन खुब भिंगोया , इस होली के रंग में , तुम भी प्रेम की इस खुश्बू को रख लो अपने संग में ।   ऐसा रंग रंगें मिलजुल कर फीकी ना हो पाये , जीवन-उत्सव की खुशियों से हर कोना भर जाये ।   अब के बरस कुछ यूं कर डालें सबको साथ बुलाकर , अपने दिल की खुशियां बाटें सबको गले लगाकर ।   अबीर-गुलाल और झांझ-मजीरे सबका दिल बहलायें , रौशन दिल…

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प्रेम -दीप

प्रेम -दीप

मोहब्बत के दीये, ऐसे जलाएं, गगन के तारकों से जगमगायें . जहाँ नफरत की आँधी तोड़ती ,दरवाज़ा -ए -मिल्लत , चलो वैसे जहां को, भूल जाएँ . महकते फूल की मानिंद ,कुछ एहसान यूँ कर दें , मचलती तितलियों को खूब भायें. यही अंजाम होना है ,यहाँ पर प्यार वालों का , हँसे दो पल औ फिर आँसू बहायें . कभी दीपक ,कभी जुगनू व सूरज -चाँद सा बनकर , उजालों की नयी महफिल सजायें।…

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आया ऋतुराज

आया ऋतुराज

देखो ! इतराते तरुवर में और लहराती फ़सलों में भी .. लगा सुनाई देने फिर से , ऋतु परिवर्तन का उद्घोष ..! कान्ति भास्कर की अब तो , निसदिन हो रही अधिक प्रखर .. तीव्र तेज का वेष धर , हुआ ताप अब अधिक मुखर ..! इधर – उधर मुंडेरों पर और एक डाल से दूजी डाली खग , भ्रमर चहकते हैं ऐसे उनमें भी नव-उमंग हो जैसे ..! नव किस्लय / नव पल्लव ,…

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गीत

गीत

पूजी गनेस लछमी चाहत बानी अउरी खेदेले दरिद्दर माई पीटी सूपा दउरी ॥   लीपि पोती दुअरा बनावेली गोधना करें दुवारे गोबरी पुवरा बने पोतना गाई गाई गीतिया सराप दीहें चउरी  ॥   मुसरा से कुटी के हंसत मोर धियरी भइया के दें बजरी माथे ओढ़ी चुनरी रहिया निरेखी भउजी खोली, चचरा धउरी ॥   संगे नवका चिउरा चिनिया के मिठाई सझिए पुजइहें देव होई बसिया बटाई तबो बहिनी दुलारी भाई करी चिरउरी ॥  …

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दुर्गा माई से हथजोरिया

दुर्गा माई से हथजोरिया

मति, गतिहीन बानीं, बुधिओ, बिबेक न बा, तबो हाथ जोरि ठाढ़ बानीं अगुवानी के. दरद, अभाव, पीर महलो का होला, बाकी सबका से ढेर बाटे टुटही पलानी के. मनवाँ के अंगना नयनजल लिपनीं, त दियना अँजोर करे तनवाँ- दलानी के. आव$, आव$, आव$ अब देर ना लगाव$, हम राह ताकतानीं, गुनखानी महारानी के.   नाहीं कुछ चाह बा कि दोसरा के हक छीनि, हमरे दुआर प बहा दीं उपरवछा. हमरा के पगड़ी त दोसरो के…

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पिया नाहीं चइत में घरवा ए रामा

डाॅ. रामरक्षा मिश्र विमल 1. जाए नाहीं देबि हम बहरवा ए रामा, एह पारी तोहके। भले तनी कम मिली ओतने में रहबो गाँवही में करबो गुजरवा ए रामा, एह पारी तोहके। तहरे करेजवा से सटिके जुड़इबो नाहीं चाहीं घूमे के शहरवा ए रामा, एह पारी तोहके। पइसा के भूखे काहें देंहिया सुखइब हम पिअबि बिरह जहरवा ए रामा, एह पारी तोहके। 2. रोंआ-रोंआ खुशिया समाइल ए रामा, पिया घरे अइले। मध दुपहरिया के तपल बटोहिया…

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चारि गो चइता

चारि गो चइता

 :: रामरक्षा मिश्र विमल:: 1.  जाए नाहीं देबि हम बहरवा ए रामा , एह पारी तोहके। भले तनी कम मिली ओतने में रहबो गाँवही में करबो गुजरवा ए रामा, एह पारी तोहके। तहरे करेजवा से सटिके जुडइबो नाहीं चाहीं घूमे के शहरवा ए रामा, एह पारी तोहके। पइसा के भूखे काहें देंहिया सुखइब हम पिअबि बिरह जहरवा ए रामा , एह पारी तोहके।   2.  रोंआ-रोंआ खुशिया समाइल ए रामा, पिया घरे अइले। मध दुपहरिया के…

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काहे को करूं श्रृंगार रे सखिया

काहे को करूं श्रृंगार रे सखिया

काहे को करूं श्रृंगार रे सखिया बालम जो परदेसवा में बा कौन निहारेगा  नाक के नथुनी, कौन निहारेगा आंख के कजरा कौन निहारेगा माथे की बिंदिया काहे को करूं श्रृंगार रे सखिया किसी को सुनाऊंगी ना कोयल सी बोली बन के रहूंगी मैं एक भोली मन मचलाऊंगी ना बाहों की पँखिया काहे को करूं श्रृंगार रे सखिया सब बतियाऊंगी दिलवा के बतिया आएंगे जो साजन ,सेजिया पर रतिया चाहूंगी मैं प्यार, हार नहीं नौलखिया काहे…

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हँसियो उधार हो गइल

हँसियो उधार हो गइल

कइसन कवन पेंच फँसल भइया भरल घाव जियतार हो गइल ॥ इहवाँ हँसियो उधार हो गइल ॥   अनकह जथारथ मनहीं न भावे करनी बिना बस बख़रा गिनावे देखs दिनही अन्हार हो गइल ॥ इहवाँ हँसियो…..   पसरल अंजोरिया दियरी लजाले बीच मझधार मे डेंगिया भुलाले मलाहो क मति बेजार हो गइल ॥ इहवाँ हँसियो….   मीन मेख हेरल निहारल लुगरी सपना भइल अब टहटह पियरी चकती उहेरल ब्योपार हो गइल ॥ इहवाँ हँसियो….  …

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गीतिया सखि रे हम कइसे आजु गाई

गीतिया सखि रे हम कइसे आजु गाई

गीतिया सखि रे हम कइसे आजु गाई ! माइ छठि हे माइ, कइसे हम मनाई !! ताल ना शबद – पद, लय कहाँ पाई ! मुढ़-मति बानी, कइसे के गोहराई !! कहाँ सखि रे हम,शरधा फुल पाई !! !! मधि भवरवां फुल, छत- विछत कइले ! परल जहर फल, साग बिषरस भइले ! दूषित माखन भोग, कइसे हम लगाई !! नदिया-तलइयां दूषित, जल-पत्तर! देहिया पवितर बा,मइल मन- अंतर !! देव सुरुज देव, कइसे अरघ दियाई…

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