पिया नाहीं चइत में घरवा ए रामा

डाॅ. रामरक्षा मिश्र विमल 1. जाए नाहीं देबि हम बहरवा ए रामा, एह पारी तोहके। भले तनी कम मिली ओतने में रहबो गाँवही में करबो गुजरवा ए रामा, एह पारी तोहके। तहरे करेजवा से सटिके जुड़इबो नाहीं चाहीं घूमे के शहरवा ए रामा, एह पारी तोहके। पइसा के भूखे काहें देंहिया सुखइब हम पिअबि बिरह जहरवा ए रामा, एह पारी तोहके। 2. रोंआ-रोंआ खुशिया समाइल ए रामा, पिया घरे अइले। मध दुपहरिया के तपल बटोहिया…

Read More

चारि गो चइता

चारि गो चइता

 :: रामरक्षा मिश्र विमल:: 1.  जाए नाहीं देबि हम बहरवा ए रामा , एह पारी तोहके। भले तनी कम मिली ओतने में रहबो गाँवही में करबो गुजरवा ए रामा, एह पारी तोहके। तहरे करेजवा से सटिके जुडइबो नाहीं चाहीं घूमे के शहरवा ए रामा, एह पारी तोहके। पइसा के भूखे काहें देंहिया सुखइब हम पिअबि बिरह जहरवा ए रामा , एह पारी तोहके।   2.  रोंआ-रोंआ खुशिया समाइल ए रामा, पिया घरे अइले। मध दुपहरिया के…

Read More

काहे को करूं श्रृंगार रे सखिया

काहे को करूं श्रृंगार रे सखिया

काहे को करूं श्रृंगार रे सखिया बालम जो परदेसवा में बा कौन निहारेगा  नाक के नथुनी, कौन निहारेगा आंख के कजरा कौन निहारेगा माथे की बिंदिया काहे को करूं श्रृंगार रे सखिया किसी को सुनाऊंगी ना कोयल सी बोली बन के रहूंगी मैं एक भोली मन मचलाऊंगी ना बाहों की पँखिया काहे को करूं श्रृंगार रे सखिया सब बतियाऊंगी दिलवा के बतिया आएंगे जो साजन ,सेजिया पर रतिया चाहूंगी मैं प्यार, हार नहीं नौलखिया काहे…

Read More

हँसियो उधार हो गइल

हँसियो उधार हो गइल

कइसन कवन पेंच फँसल भइया भरल घाव जियतार हो गइल ॥ इहवाँ हँसियो उधार हो गइल ॥   अनकह जथारथ मनहीं न भावे करनी बिना बस बख़रा गिनावे देखs दिनही अन्हार हो गइल ॥ इहवाँ हँसियो…..   पसरल अंजोरिया दियरी लजाले बीच मझधार मे डेंगिया भुलाले मलाहो क मति बेजार हो गइल ॥ इहवाँ हँसियो….   मीन मेख हेरल निहारल लुगरी सपना भइल अब टहटह पियरी चकती उहेरल ब्योपार हो गइल ॥ इहवाँ हँसियो….  …

Read More

गीतिया सखि रे हम कइसे आजु गाई

गीतिया सखि रे हम कइसे आजु गाई

गीतिया सखि रे हम कइसे आजु गाई ! माइ छठि हे माइ, कइसे हम मनाई !! ताल ना शबद – पद, लय कहाँ पाई ! मुढ़-मति बानी, कइसे के गोहराई !! कहाँ सखि रे हम,शरधा फुल पाई !! !! मधि भवरवां फुल, छत- विछत कइले ! परल जहर फल, साग बिषरस भइले ! दूषित माखन भोग, कइसे हम लगाई !! नदिया-तलइयां दूषित, जल-पत्तर! देहिया पवितर बा,मइल मन- अंतर !! देव सुरुज देव, कइसे अरघ दियाई…

Read More

हाय कब ले भरम से तरी आदमी

हाय कब ले भरम से तरी आदमी

डाॅ. रामरक्षा मिश्र विमल हाय कब ले भरम से तरी आदमी हाय कब ले भरम से तरी आदमी जिंदगी से दिलग्गी करी आदमी राह पर ना चले के कसम खाइके राह कबले देखावल करी आदमी राह छूटल त दर दर भटकि बा रहल कब ले परयोग आउर करी आदमी ताख पर लाज लेहाज कब ले धरी जानवर से भवद्दी करी आदमी बारके हर गली में दिया नेह के ए ‘विमल’ कब अन्हरिया हरी आदमी मन…

Read More

राम जियावन दास ‘बावला’ के दू गो गीत

राम जियावन दास ‘बावला’ के दू गो गीत

पग पग धरती सिवनवा क नापइ देहियाँ क सुधि नाहीं फटहा झिंगोला।   तपनी थिथोर होय सँझवा के दर दर बुढ़ऊ क कहनी सोहाय भर टोला।   उँखिया क रस कोल्हुवड़वा बोलावइ गुड़वा सोन्हाय त उमगि जाय चोला।   गँवई क गाँव जहाँ दिन भर चाँव माँव धूरिया लपेट के फिरैलैं बम भोला।। —————————   शुभ-शुभ-शुभ नया साल हो   बासल बयार ऋतुराज क सनेस देत गोरकी चननिया क अँचरा-गुलाल हो   खेत-खरिहान में सिवान…

Read More

वसंत अइले नियरा

वसंत अइले नियरा

केशव मोहन पाण्डेय@bhojpuripanchayat.in हरसेला हहरत हियरा हो रामा, वसंत अइले नियरा।। मन में मदन, तन ले ला अंगड़ाई, अलसी के फूल देखि आलस पराई, पीपर-पात लागल तेज सरसे, अमवा मोजरीया से मकरंद बरसे, पिहू-पिहू गावेला पपीहरा हो रामा, वसंत अइले नियरा।। मटरा के छिमिया के बढ़ल रखवारी, गेहूँआ के पाँव भइल बलीया से भारी, नखरा नजर आवे नजरी के कोर में, मन करे हमहूँ बन्हाई प्रेम-डोर में, जोहेला जोगिनीया जियरा हो रामा, वसंत अइले नियरा।।…

Read More

अशोक द्विवेदी के दूगो गज़ल

अशोक द्विवेदी के दूगो गज़ल

डाॅ. अशोक द्विवेदी [ क ] जख्म को दिल में करीने-से सजा लेती हैं पत्तियाँ, पेड़ का हर ऐब छुपा लेती हैं. पत्तियाँ जागते एहसास का समन्दर हैं अपनी हरियाली में, आकाश बुला लेती हैं. पत्तियाँ वक्त के बदलाव को पढ़ लेती है उसकी आहट को, इशारों में जता लेती हैं. उनको परवा‘नहीं, अपमान या सम्मान मिले आपके वास्ते वे खुद को बिछा लेती हैं. धूप हो तेज या बारिश हो, आपकी खातिर पत्तियाँ, कुछ…

Read More

छूट के छूट उडे

छूट के छूट उडे

तन तोप के घुमल छूटल, मन के रास ढिलाइल बा। मश्किल बा कहल एघडी, के केकरा संगे अझुराईल बा।। छूट के, छूट के धज्जी उडे उन्नति के डगर धराईल बा। सांझे पराते गोंईंया बदले एकईसवीं सदी आईल बा।। सत् असत् कुछुओ ना होला, धन से सब तोपाईल बा। जांच के जे कोख में मरलस, उ लडकी ला खखनाईल बा।। धर्मी मनई के झुकल पताका अधरमियन के लहराईल बा। नेकी कइलें तीन पीछा गइलें कपटीयन ला…

Read More
1 2