अशोक द्विवेदी के दूगो गज़ल

अशोक द्विवेदी के दूगो गज़ल

डाॅ. अशोक द्विवेदी [ क ] जख्म को दिल में करीने-से सजा लेती हैं पत्तियाँ, पेड़ का हर ऐब छुपा लेती हैं. पत्तियाँ जागते एहसास का समन्दर हैं अपनी हरियाली में, आकाश बुला लेती हैं. पत्तियाँ वक्त के बदलाव को पढ़ लेती है उसकी आहट को, इशारों में जता लेती हैं. उनको परवा‘नहीं, अपमान या सम्मान मिले आपके वास्ते वे खुद को बिछा लेती हैं. धूप हो तेज या बारिश हो, आपकी खातिर पत्तियाँ, कुछ…

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छूट के छूट उडे

छूट के छूट उडे

तन तोप के घुमल छूटल, मन के रास ढिलाइल बा। मश्किल बा कहल एघडी, के केकरा संगे अझुराईल बा।। छूट के, छूट के धज्जी उडे उन्नति के डगर धराईल बा। सांझे पराते गोंईंया बदले एकईसवीं सदी आईल बा।। सत् असत् कुछुओ ना होला, धन से सब तोपाईल बा। जांच के जे कोख में मरलस, उ लडकी ला खखनाईल बा।। धर्मी मनई के झुकल पताका अधरमियन के लहराईल बा। नेकी कइलें तीन पीछा गइलें कपटीयन ला…

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मोर दुवरिया अइहें ना

मोर दुवरिया अइहें ना

मइया भारती के संस्कार के पुजरिया मोर दुवरिया अइहें ना ॥ करिहें देश रखवरिया , मोर दुवरिया अइहें ना ॥   सीमवाँ पर दीहें आपन जनवाँ लुटाई हर घरी देश खातिर छतिया सजाई । उनुके से लउकत टह टह अंजोरिया मोर दुवारिया अइहें ना ॥ करिहें…………   देश से गुलमिया के दीहने मेटाई बिना गिनले आपन सिरवा कटाई काँपत दुसमन देखी भगत के तेवरिया मोर दुवरिया अइहें ना ॥ करिहें…………   सुखदेव भगत सिंह राजगुरु…

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भरोसा तुनें तोड़ा………!

भरोसा तुनें तोड़ा………!

हम सब का एतबार भरोसा तुनें तोड़ा बना दें कैसे फिर सरकार भरोसा तुनें तोड़ा।   जातिवाद के समीकरण का बन कर पालनहार भरोसा तुनें तोड़ा लोकतंत्र यह किसका था, अब किसका है अधिकार भरोसा तुनें तोड़ा।   बना दें कैसे फिर सरकार भरोसा तुनें तोड़ा।   तुष्टिकरण के आगे कर के सेकुलरता लाचार भरोसा तुनें तोड़ा जन जन की नईया भेंट चढ़ा कर दंगो के पतवार भरोसा तुनें तोड़ा।   बना दें कैसे फिर…

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