नारीसक्ति, संघर्ष और सफलता की मिशाल ‘लीला सिन्हा’

नारीसक्ति, संघर्ष और सफलता की मिशाल ‘लीला सिन्हा’

जन्म के साथ ही मैं माँ बाप के लिए एक श्राप बन गयी थी। क्योकि हम चार बहने है जिसमे मैं सबसे छोटी हूँ। मेरे साथ मेरा एक भाई जो की पैदा होते ही मर गया था और मैं जिंदा पैदा हुई, इसलिए सबको लगता है कि मंै पैदा होते ही अपने भाई को खा गयी, पर इसमे मेरा कसूर क्या था? जब मै थोड़ी बड़ी हुई तो पहली बार गाँव आयी, जो रोहतास जिला…

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