एक पत्र संत वेलेंटाइन के नाम

एक पत्र संत वेलेंटाइन के नाम

संत वेलेंटाइन सुनो ! आजकल बड़ा जलवा है गुरु तुम्हारा । फेसबुक,ट्वीटर, व्हाट्स एप,अख़बार के पन्ने, किसी कालखण्ड का बुद्धू बक्सा आज जो बेहद चतुर और अनिवार्य हो गया है उसमें , हर कहीं,हर ओर तुम्हारी चर्चा है।इतनी चर्चा है कि वसंत का मुख भी पीला पड़ गया है।वैसे पीला सिर्फ तुम्हारी वजह से नहीं खुद उसके चाहने वालों की तरफ़ से भी है।कोयल नहीं कूकती, मंजरियाँ दूर -दूर तक नहीं दीखतीं, मदनोत्सव नहीं होता तो…

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ढाई आखर प्रेम का

ढाई आखर प्रेम का

प्रेम कहल केकरा के जाला , ई  एगो बिचारे जोग बात ह ।  प्रेम एगो अलगे चीजु ह आ आजकल  जेकरा के प्रेम कहल जा रहल  ह , उ प्रेम ना ह , उ आसक्ति ह, मोह ह । चीज होती है प्रेम । आज जेकरा के प्रेम कहल जा रहल बा  उ दोसरा के संगे अपना के जोड़ के पहिचान बनावे के एगो तरीका भर ह । एकरा के प्रेम ना कहाला , एकरा…

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बारिश, बरबादी और बीमा

बारिश, बरबादी और बीमा

मौसम का मिज़ाज़ कब बदल जाये, कोई नहीं जानता। गीतों में मौसम को बेवफ़ा कहा जाता है। इस बार मौसम एकाएक ऐसा बदला था कि अब ये भी याद दिलाना पड़ रहा था कि मार्च का महीना है। ये मार्च में मॉनसून जैसा हाल रहा। मौसम में आए अचानक बदलाव ने आम आदमी से लेकर सरकारों तक को मुश्किल में डाल दिया। पूरा देश बारिश की बौछारों से मुश्किल में था। श्रीनगर में बर्फबारी होने…

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जिन्हें नाज है भोजपुरी पर, वो कहाँ हैं….

जिन्हें नाज है भोजपुरी पर, वो कहाँ हैं….

सैद्धांतिक तौर पर कहा जाता है कि जो भाषा रोजगार के अवसर उपलब्ध नहीं करा पाती, उस भाषा का अस्तित्व धीरे-धीरे खत्म होता जाता है। लेकिन यह सिद्धांत भोजपुरी के साथ ठीक-ठीक सामंजस्य नहीं बना पा रहा। सीधे तौर पर देखें तो अभी तक भोजपुरी को संवैधानिक दर्जा भी नहीं मिला है पर इसके बावजूद यह भाषा अपनी उत्पत्ति क्षेत्र की सीमा लांघ कर दुनिया के लगभग 20 देशों में पंख पसार चुकी है। भाषा…

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