जिनगी के हर कोना के उकेरत कविता संग्रह “जिनगी रोटी ना हs”

जिनगी के हर कोना के उकेरत कविता संग्रह “जिनगी रोटी ना हs”

आजु के जुग मे जहवाँ रिस्तन के जमीन खिसक रहल बा , अपनत्व के थाती बिला रहल बा ,उहवें एकरा के जीयब उहो जीवंतता के संगे , एगो मिशाल हs । जवने समय में मनई अपने माई भाषा के बोले मे शरम महसूस करत होखो , ओहि समय मे आपन  माई भाषा बोलल आउर ओहु से बढ़ी के ओह मे साहित्य रचल , एगो लमहर काम बाटे । उहवें कवि हृदय केशव मोहन पांडेय जी…

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