सरगो से नीमन बाटे सइँया के गाँव रे

सरगो से नीमन बाटे सइँया के गाँव रे

सरगो से नीमन बाटे सइँया के गाँव रे डाॅ. रामरक्षा मिश्र विमल बसंत का आइल, गाँव के इयादि एक-एक क के ऊठत-बइठत आ सूतत खा तंग करे लागलि। होलरि, खातिर रहरेठा, झीली निकाले खातिर सरसो के अबटन आ मधि रतिए होलरि-होलरि के आवाज चारों ओरि से। ओही में हमनियो का आवाज में आवाज मिलावत, कान्ही पर होलरि ध के तरना के चलीं जा लरिकाईं में। एही गाँव-प्रेम में फेसबुक पर अपना गाँव का नाँव से…

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राम और भारतीय जन-मानस

राम और भारतीय जन-मानस

केशव मोहन पाण्डेय राम! भारतीय जनमानस के अंतःकरण में बसा नाम। राम का नाम जन-जन को क्षण-क्षण प्रेरित करता है। प्रेरित करता हैं अनाचार का विरोध करने के लिए। प्रेरित करता है बुराई का नाश करने के लिए। प्रेरति करता है राम के आदर्शों का अनुगामी बनने के लिए। राम अठाइसवें चतुर्युगी के त्रेतायुग में हुए राजा थे। राम का चरित्र इतना विशाल है कि आज कलियुग में भी वे घर-घर में, जन-जन के मन…

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जोगीजी….धीरे-धीरे! जोगीजी…..बाह…..जोगीजी!

जोगीजी….धीरे-धीरे! जोगीजी…..बाह…..जोगीजी!

पं. प्रभाकर पांडेय गोपालपुरिया गाना-बजाना ना आवेला हमरा, पर गाना-बजाना सुनल बहुते नीक लागेला। हँ पर लोकगीतन, पुराना गीतन आदि के सुनल हम खूब पसंद करेनी। इ जवन सीर्सक बा- जोगीजीवाला, इहां इ गाना की रूप में नइखे, हम जोगीजी के बात करतानी। जी हाँ, योगी आदित्यनाथ जी के, यूपी की माननीय मुख्यमंत्री जी के। यूपी में जवनेगाँ भाजपा जीतलि ह, सायद ओंगा केहू के उम्मीद ना रहल होई। साइकिल पूरा तरे पेंचर हो गइल,…

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लोकभाषा के काव्य आ ओकरा चर्चा पर चर्चा

लोकभाषा के काव्य आ ओकरा चर्चा पर चर्चा

डाॅ. अशोक द्विवेदी@bhojpuripanchayat.in – लोकभाषा में रचल साहित्य का भाव भूमि से जुड़े आ ओकरा संवेदन-स्थिति में पहुँचे खातिर, लोके का मनोभूमि पर उतरे के परेला। लोक कविताई के सौन्दर्यशास्त्र समझे खातिर लोकजीवन के संस्कृति, लोकदृष्टि आ ओकरा अनुभव-सिद्ध मान्यता आ संवेदन-ज्ञान के समझल जरूरी बा। अक्सरहा एघरी, कुछ लोग भोजपुरी साहित्य आ ओकरा कविताई के अपना विचार दर्शन, अपना रूचि-पूर्वाग्रह आ जानल सुनल राजनीतिक-समाजिक अवधारणा आदि का सुबिधानुसार देखे,जाने आ आँके के कोसिस का साथ…

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“तिरिया चरित्रम्, पुरुषस्य भाग्यम्, दैवो न जानसि”

“तिरिया चरित्रम्, पुरुषस्य भाग्यम्, दैवो न जानसि”

Dhananjay Tiwari@bhojpuripanchayat.in “तिरिया चरित्रम्, पुरुषस्य भाग्यम्, दैवो न जानसि” पंडिताई एगो विशिष्ट ज्ञान ह या ना पर इ एगो मनोविज्ञान जरूर ह, इ सोच पंडित भोला नाथ हमेशा मानेले। काहे से कि उ कवनो गुरुकुल में त पंडिताई के शिक्षा ना लेहले पर पुरखा लोग से मिलल थोड़ा बहुत ज्ञान अउरी एहि मनोविज्ञान के बल पर उ अपना पंडिताई के डंका बजवले बाड़े। बड़ से बड़ मनई उनका लगे आपन भागी बचवावे आवेला अउरी बुरा…

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भोजपुरिया के? एगो लहमर सवाल बा……

भोजपुरिया के? एगो लहमर सवाल बा……

भोजपुरिया के? भोजपुरिया के?ए पर अइले से पहिले एगो बिरतांत सुना देहल चाहबि। हमरा मोन परेला की पहिले जब बरदेखुआ आवे (आवेंसन) त लइका के केहू करीबी ओ बरदेखूअन से कहे की लइका की मामा की चचिआउत फूफा के दमाद कलेक्टर हउअन, लइका के बाबा की मउसिआउत भाई के लइका सरकारी डाक्टर ह…आदि…बरदेखुओ के पता रहे की लइका के ए दूनू जाने (कलेक्टर अउर डाक्टर) से, गरज परले पर कवनो फायदा ना होई…फिर भी उ…

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लोक, लोकभाषा और उसका साहित्य

लोक, लोकभाषा और उसका साहित्य

डाॅ. अशोक द्विवेदी@bhojpuripanchayat.in तेजी से बदलते समय में, आधुनिक जीवन शैली शहरों, महानगरों में रह रहे लोगों को ‘लोक’ से दूर करती जा रही है। आज के आदमी को लोक की आत्मीय सुधि तो आती है पर उसकी आत्मीय-चेतनता, उससे इसलिये जुड़ नहीं पाती क्योंकि लोक परंपरा से मिली सुनने-सुनाने वाली भाषा ही छूट गई है। नई भाषा, जिसमें उसका क्रिया-व्यापार चल रहा है, उसमें लोक के जीवन्त तत्व (संवेदना, सामूहिकता और आपुसी हृदय-संवादिता) लुप्तप्राय…

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विवाह गीत-लोकमन की आकांक्षा अवरी आशंका

विवाह गीत-लोकमन की आकांक्षा अवरी आशंका

डाॅ. विन्दा पाण्डेय@bhojpuripanchayat.in – अनादि काल से ही लोक-मन के इच्छा-आकांक्षा, आशा-विश्वास आदि के अभिव्यक्ति लोकगीतन में भइल बा। ये गीतन में लोकमन के आकांक्षा यदि आसमान छुवले बा, त ओही की बीच से न जाने कब आशंका भी सिर उठा लिहले बा। मानव-मन जब भी शंकालु होता तब-तब आशंका उत्पन्न होला। हर काम के पूर्णता-अपूर्णता, सपफलता-असपफलता के बीच आशंका के एगो झीन तार दिखायी देला। ओ झीन-तार के हटा दिहले की बाद जन-आकांक्षा आसमान से…

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भोजपुरी भाषा पर क्यों मची खलबली?

भोजपुरी भाषा पर क्यों मची खलबली?

अजीत दुबे@bhojpuripanchayat.in – भोजपुरी संवैधानिक मान्यता की दहलीज पर खड़ी है। केंद्रीय सरकार में शामिल कई मंत्रियों द्वारा दिये गए हालिया आश्वासनों से यह उम्मीद सबल हुई है। 20 करोड़  भोजपुरी भाषियों के लिए यह जहाँ सुकून देने वाली सूचना है वहीं दूसरी ओर चंद कथित हिंदी सेवी, हिंदी बचाओं का अनर्गल व बेतुका प्रलाप कर रहे हैं। इन छद्म हिंदी के हितैषियों को ऐसा लगता है कि भोजपुरी कि संवैधानिक मान्यता से हिंदी विखंडित होगी।…

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भोजपुरी लोक कला आ देशज ज्ञान के इन्वर्सिटी !

भोजपुरी लोक कला आ देशज ज्ञान के इन्वर्सिटी !

भोजपुरी हिन्दी प्रदेश के हृदय केन्द्र में मौजूद अइसन नाड़ी बा जवन उत्तर प्रदेश के बनारस-गोरखपुर से लेके आरा-छपरा तक फइलल बा। एकर विस्तार कलकत्ता, बम्बई, दिल्ली जइसन महानगरन  तक बा. काहें से कि पुरबिया लोग रोजगार खातिर देश के बहुत जगह में जाके बसल बाड़े। अपना देश के बाहर भी फिजी, ट्रिनिडाड, सूरीनाम, अउर मारीशस से लेके हालैण्ड आ दक्षिण अफ्रीका ले लाखन के संख्या मे भोजपुरी क्षेत्र के लोग जाके आपन भाषा, संस्कृति…

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