भोजपुरी के हजार बरिस

भोजपुरी के हजार बरिस

भोजपुरी के इतिहास हजार बरिस से पुरान हवे। चैरासी सिद्धन के कविता में भोजपुरी के क्रिया रूप मिलेला। आगे चलि के गोरखनाथ के बानी में भोजपुरी के विकसित रूप देखाई परेला। गोरखनाथ के कई गो भोजपुरी कविता मिलेली। ओकरे बाद कबीर के बानी में भोजपुरी कविता मिलेली। कबीर दास के बाद ओनइसवीं सदी ले भोजपुरी में लिखे वाल निरगुन संतन  के बहुत लमहर परम्परा बा। धरमदास, कमालदास, पलटू साहेब, लक्ष्मी सखी, दरिया साहेब, शिवनारायण, गुलाल साहेब जइसन संतन कीहां भोजपुरी कविता के…

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भोजपुरी का लोक साहित्य अथाह समुद्र है

भोजपुरी का लोक साहित्य अथाह समुद्र है

बोलियाँ अपने ऐतिहासिक विकास क्रम में विकसित होकर भाषा का रूप ले लेती हैं। भोजपुरी अपने इतिहास के इसी मुहाने पर खड़ी है। भोजपुरी का लोक साहित्य अथाह समुद्र है तो भोजपुरी में प्रचुर मात्रा में लिखित साहित्य भी मौजूद है। निर्गुण सन्त कवियों द्वारा कैथी लिपि में लिखित भोजपुरी साहित्य की विशाल सम्पदा मठों और आश्रमों में अपने शोधकत्र्ताओं का इन्तजार कर रही हैं। हीरा डोम से लेकर भिखारी ठाकुर, राहुल सांकृत्यायन, धरीक्षण मिश्र,…

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कबीर के दामपत्य प्रतीको में भोजपुरी की बानगी

कबीर के दामपत्य प्रतीको में भोजपुरी की बानगी

सन्त लोगन क सबसे प्रिय प्रतीक दामपत्य भाव रहल । कबीर मूलतः सन्त रहनै। सन्तन मे दू प्रकार क योजना पावल जाला एगो परम्परा से मिलेला अऊर दूसर स्वयम अपने कवि करम से। कवि क जीवन दरशन अऊर मूल चिन्तन शैली क दर्शन होला। एही लिए सन्त कवियन मे प्रतीक बिधान देखेके मिलेला इ लोगन के अइसने प्रतीकन से उनकर पुरहर साधनात्मक जीनगी प्रतिबिम्बित होखेला । हाँ लोकजीवन अउर परम्परा से मिले वालन प्रतीकन के…

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