गीत

गीत

पूजी गनेस लछमी चाहत बानी अउरी खेदेले दरिद्दर माई पीटी सूपा दउरी ॥   लीपि पोती दुअरा बनावेली गोधना करें दुवारे गोबरी पुवरा बने पोतना गाई गाई गीतिया सराप दीहें चउरी  ॥   मुसरा से कुटी के हंसत मोर धियरी भइया के दें बजरी माथे ओढ़ी चुनरी रहिया निरेखी भउजी खोली, चचरा धउरी ॥   संगे नवका चिउरा चिनिया के मिठाई सझिए पुजइहें देव होई बसिया बटाई तबो बहिनी दुलारी भाई करी चिरउरी ॥  …

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समाजवाद की नूरा कुश्ती

समाजवाद की नूरा कुश्ती

का ज़माना आ गयो भाया, समाजवादियों की नूरा कुश्ती ने तो कार्टून चैनलों के टी आर पी की वाट लगा दी . वैसे भी वर्ष के प्रथम माह में कार्टून चैनल देखने वालो विदेश यात्रा पर चले जाते हैं , वो भी बिना किसी पूर्व सूचना के . बेचारे चैनल वाले , उनकी स्थिति तो सांप छछुंदर वाली हो जाती है . बचे – खुचे उस राशि वाले नूरा कुश्ती देखने में मस्त हैं ,…

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हँसियो उधार हो गइल

हँसियो उधार हो गइल

कइसन कवन पेंच फँसल भइया भरल घाव जियतार हो गइल ॥ इहवाँ हँसियो उधार हो गइल ॥   अनकह जथारथ मनहीं न भावे करनी बिना बस बख़रा गिनावे देखs दिनही अन्हार हो गइल ॥ इहवाँ हँसियो…..   पसरल अंजोरिया दियरी लजाले बीच मझधार मे डेंगिया भुलाले मलाहो क मति बेजार हो गइल ॥ इहवाँ हँसियो….   मीन मेख हेरल निहारल लुगरी सपना भइल अब टहटह पियरी चकती उहेरल ब्योपार हो गइल ॥ इहवाँ हँसियो….  …

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“इटली वाली पंचर साइकिल , कहाँ चलाई होरी मे” के साथ गाजियाबाद कम्पुटर असोशिएशन का होली मिलन सम्पन्न

“इटली वाली पंचर साइकिल , कहाँ चलाई होरी मे” के साथ गाजियाबाद कम्पुटर असोशिएशन का होली मिलन सम्पन्न

गाजियाबाद कम्पुटर असोशिएशन द्वारा आहूत होली मिलन सह काव्योत्सव का आगाज आज होटल रेडवरी अंबेडकर रोड मे आज दिनांक 11/03/2017 को सफलता पूर्वक सम्पन्न हुआ । कम्पुटर असोशिएशन द्वारा आए हुये सभी मेहमानो के स्वागत के साथ कार्यक्रम का आगाज हुआ । सम्मानित होने वाले मेहमानो मे श्री राम किसोर अग्रवाल , श्री गोपी चंद और श्री अशोक चावला जी का प्रतीक चिन्ह और शाल भेंट कर असोशिएशन के पदाधिकारियों और कम्पुटर व्यापारियों द्वारा किया…

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जिनगी के हर कोना के उकेरत कविता संग्रह “जिनगी रोटी ना हs”

जिनगी के हर कोना के उकेरत कविता संग्रह “जिनगी रोटी ना हs”

आजु के जुग मे जहवाँ रिस्तन के जमीन खिसक रहल बा , अपनत्व के थाती बिला रहल बा ,उहवें एकरा के जीयब उहो जीवंतता के संगे , एगो मिशाल हs । जवने समय में मनई अपने माई भाषा के बोले मे शरम महसूस करत होखो , ओहि समय मे आपन  माई भाषा बोलल आउर ओहु से बढ़ी के ओह मे साहित्य रचल , एगो लमहर काम बाटे । उहवें कवि हृदय केशव मोहन पांडेय जी…

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