ढाई आखर प्रेम का

ढाई आखर प्रेम का

प्रेम कहल केकरा के जाला , ई  एगो बिचारे जोग बात ह ।  प्रेम एगो अलगे चीजु ह आ आजकल  जेकरा के प्रेम कहल जा रहल  ह , उ प्रेम ना ह , उ आसक्ति ह, मोह ह । चीज होती है प्रेम । आज जेकरा के प्रेम कहल जा रहल बा  उ दोसरा के संगे अपना के जोड़ के पहिचान बनावे के एगो तरीका भर ह । एकरा के प्रेम ना कहाला , एकरा…

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