आया ऋतुराज

आया ऋतुराज

देखो ! इतराते तरुवर में और लहराती फ़सलों में भी .. लगा सुनाई देने फिर से , ऋतु परिवर्तन का उद्घोष ..! कान्ति भास्कर की अब तो , निसदिन हो रही अधिक प्रखर .. तीव्र तेज का वेष धर , हुआ ताप अब अधिक मुखर ..! इधर – उधर मुंडेरों पर और एक डाल से दूजी डाली खग , भ्रमर चहकते हैं ऐसे उनमें भी नव-उमंग हो जैसे ..! नव किस्लय / नव पल्लव ,…

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