राम जियावन दास ‘बावला’ के दू गो गीत

राम जियावन दास ‘बावला’ के दू गो गीत

पग पग धरती सिवनवा क नापइ देहियाँ क सुधि नाहीं फटहा झिंगोला।   तपनी थिथोर होय सँझवा के दर दर बुढ़ऊ क कहनी सोहाय भर टोला।   उँखिया क रस कोल्हुवड़वा बोलावइ गुड़वा सोन्हाय त उमगि जाय चोला।   गँवई क गाँव जहाँ दिन भर चाँव माँव धूरिया लपेट के फिरैलैं बम भोला।। —————————   शुभ-शुभ-शुभ नया साल हो   बासल बयार ऋतुराज क सनेस देत गोरकी चननिया क अँचरा-गुलाल हो   खेत-खरिहान में सिवान…

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