गीत

गीत

पूजी गनेस लछमी चाहत बानी अउरी खेदेले दरिद्दर माई पीटी सूपा दउरी ॥   लीपि पोती दुअरा बनावेली गोधना करें दुवारे गोबरी पुवरा बने पोतना गाई गाई गीतिया सराप दीहें चउरी  ॥   मुसरा से कुटी के हंसत मोर धियरी भइया के दें बजरी माथे ओढ़ी चुनरी रहिया निरेखी भउजी खोली, चचरा धउरी ॥   संगे नवका चिउरा चिनिया के मिठाई सझिए पुजइहें देव होई बसिया बटाई तबो बहिनी दुलारी भाई करी चिरउरी ॥  …

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गीतिया सखि रे हम कइसे आजु गाई

गीतिया सखि रे हम कइसे आजु गाई

गीतिया सखि रे हम कइसे आजु गाई ! माइ छठि हे माइ, कइसे हम मनाई !! ताल ना शबद – पद, लय कहाँ पाई ! मुढ़-मति बानी, कइसे के गोहराई !! कहाँ सखि रे हम,शरधा फुल पाई !! !! मधि भवरवां फुल, छत- विछत कइले ! परल जहर फल, साग बिषरस भइले ! दूषित माखन भोग, कइसे हम लगाई !! नदिया-तलइयां दूषित, जल-पत्तर! देहिया पवितर बा,मइल मन- अंतर !! देव सुरुज देव, कइसे अरघ दियाई…

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राम जियावन दास ‘बावला’ के दू गो गीत

राम जियावन दास ‘बावला’ के दू गो गीत

पग पग धरती सिवनवा क नापइ देहियाँ क सुधि नाहीं फटहा झिंगोला।   तपनी थिथोर होय सँझवा के दर दर बुढ़ऊ क कहनी सोहाय भर टोला।   उँखिया क रस कोल्हुवड़वा बोलावइ गुड़वा सोन्हाय त उमगि जाय चोला।   गँवई क गाँव जहाँ दिन भर चाँव माँव धूरिया लपेट के फिरैलैं बम भोला।। —————————   शुभ-शुभ-शुभ नया साल हो   बासल बयार ऋतुराज क सनेस देत गोरकी चननिया क अँचरा-गुलाल हो   खेत-खरिहान में सिवान…

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मोर दुवरिया अइहें ना

मोर दुवरिया अइहें ना

मइया भारती के संस्कार के पुजरिया मोर दुवरिया अइहें ना ॥ करिहें देश रखवरिया , मोर दुवरिया अइहें ना ॥   सीमवाँ पर दीहें आपन जनवाँ लुटाई हर घरी देश खातिर छतिया सजाई । उनुके से लउकत टह टह अंजोरिया मोर दुवारिया अइहें ना ॥ करिहें…………   देश से गुलमिया के दीहने मेटाई बिना गिनले आपन सिरवा कटाई काँपत दुसमन देखी भगत के तेवरिया मोर दुवरिया अइहें ना ॥ करिहें…………   सुखदेव भगत सिंह राजगुरु…

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