भोजपुरी सिनेमा: स्वर्णिम दौर में

भोजपुरी सिनेमा: स्वर्णिम दौर में

54 साल की कालावधि कम नई होती। इतने समय में कई विचारधाओं का उत्थान-पतन हो गया होता है। प्रौढ़ता के इस दौर में जीवन जीने के मायने बदल गए होते हैं। गंभीरता का आवरण व्यक्तित्व को आदर्श के उच्चासन पर विराजमान कर चुका होता है। अपनी अनुभवों नजरों से जीवन के इतने उतार-चढ़ाव को देख चुका होता है कि जीवन की विराटता और क्षणभंगुरता का आभास उसके अपने होते हैं। कालखंडों के आधार पर तो…

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