सरगो से नीमन बाटे सइँया के गाँव रे

सरगो से नीमन बाटे सइँया के गाँव रे

सरगो से नीमन बाटे सइँया के गाँव रे डाॅ. रामरक्षा मिश्र विमल बसंत का आइल, गाँव के इयादि एक-एक क के ऊठत-बइठत आ सूतत खा तंग करे लागलि। होलरि, खातिर रहरेठा, झीली निकाले खातिर सरसो के अबटन आ मधि रतिए होलरि-होलरि के आवाज चारों ओरि से। ओही में हमनियो का आवाज में आवाज मिलावत, कान्ही पर होलरि ध के तरना के चलीं जा लरिकाईं में। एही गाँव-प्रेम में फेसबुक पर अपना गाँव का नाँव से…

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