दुर्गा माई से हथजोरिया

दुर्गा माई से हथजोरिया

मति, गतिहीन बानीं, बुधिओ, बिबेक न बा, तबो हाथ जोरि ठाढ़ बानीं अगुवानी के. दरद, अभाव, पीर महलो का होला, बाकी सबका से ढेर बाटे टुटही पलानी के. मनवाँ के अंगना नयनजल लिपनीं, त दियना अँजोर करे तनवाँ- दलानी के. आव$, आव$, आव$ अब देर ना लगाव$, हम राह ताकतानीं, गुनखानी महारानी के.   नाहीं कुछ चाह बा कि दोसरा के हक छीनि, हमरे दुआर प बहा दीं उपरवछा. हमरा के पगड़ी त दोसरो के…

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