हँसियो उधार हो गइल

हँसियो उधार हो गइल

कइसन कवन पेंच फँसल भइया भरल घाव जियतार हो गइल ॥ इहवाँ हँसियो उधार हो गइल ॥   अनकह जथारथ मनहीं न भावे करनी बिना बस बख़रा गिनावे देखs दिनही अन्हार हो गइल ॥ इहवाँ हँसियो…..   पसरल अंजोरिया दियरी लजाले बीच मझधार मे डेंगिया भुलाले मलाहो क मति बेजार हो गइल ॥ इहवाँ हँसियो….   मीन मेख हेरल निहारल लुगरी सपना भइल अब टहटह पियरी चकती उहेरल ब्योपार हो गइल ॥ इहवाँ हँसियो….  …

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