जनतंत्र के महाजन का पुनर्जन्म

जनतंत्र के महाजन का पुनर्जन्म

पंकज जैसवाल वर्तमान दौर में बैंकों द्वारा अपने स्वनिर्णय के द्वारा सेवा शुल्कों में बढ़ोत्तरी से पूर्व हमें बैंकों के राष्ट्रीयकरण के इतिहास के पन्नों में झांकना पड़ेगा। हमें याद करना चाहिए कि भारत कि जनता को बैंकों की महाजनी से मुक्त कर बैंकों के राष्ट्रीयकरण के वक़्त तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इन्दिरा गांधी ने कहा था कि “बैंकिंग प्रणाली जैसी संस्था, जो हजारों -लाखों लोगों तक पहुंचती है और जिसे लाखों लोगों तक पहुंचाना चाहिए,…

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