विवाह गीत-लोकमन की आकांक्षा अवरी आशंका

विवाह गीत-लोकमन की आकांक्षा अवरी आशंका

डाॅ. विन्दा पाण्डेय@bhojpuripanchayat.in – अनादि काल से ही लोक-मन के इच्छा-आकांक्षा, आशा-विश्वास आदि के अभिव्यक्ति लोकगीतन में भइल बा। ये गीतन में लोकमन के आकांक्षा यदि आसमान छुवले बा, त ओही की बीच से न जाने कब आशंका भी सिर उठा लिहले बा। मानव-मन जब भी शंकालु होता तब-तब आशंका उत्पन्न होला। हर काम के पूर्णता-अपूर्णता, सपफलता-असपफलता के बीच आशंका के एगो झीन तार दिखायी देला। ओ झीन-तार के हटा दिहले की बाद जन-आकांक्षा आसमान से…

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